उत्तराखंड हाईकोर्ट का अहम फैसला: पत्नी का मासिक भरण-पोषण 9 हजार से बढ़ाकर 14 हजार रुपये किया, सम्मानजनक जीवन को बताया अधिकार

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने वैवाहिक भरण-पोषण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में पत्नी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उसके मासिक भरण-पोषण की राशि 9,000 रुपये से बढ़ाकर 14,000 रुपये प्रतिमाह करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि किसी भी पत्नी को सम्मानपूर्वक जीवनयापन करने के लिए पर्याप्त आर्थिक सहायता मिलना उसका वैधानिक अधिकार है और भरण-पोषण की राशि तय करते समय पति की आय, पत्नी की स्वास्थ्य स्थिति तथा मामले की सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

यह आदेश न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ ने सुनवाई के बाद पारित किया।

पत्नी ने स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति का दिया हवाला

मामले के अनुसार हल्द्वानी निवासी मीनाक्षी जोशी ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर कर भरण-पोषण की राशि बढ़ाने की मांग की थी। याचिका में उन्होंने कहा कि उनके पति वन विभाग में फॉरेस्ट गार्ड के पद पर कार्यरत हैं और उनका शुद्ध मासिक वेतन लगभग 48,615 रुपये है।

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि पति की माता पेंशन प्राप्त करती हैं और आर्थिक रूप से उन पर निर्भर नहीं हैं। इसके अलावा उन्होंने अपनी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वह स्लिप डिस्क की बीमारी से पीड़ित हैं और नियमित रूप से फिजियोथेरेपी एवं अन्य चिकित्सकीय उपचार कराना पड़ता है, जिस पर हर महीने पर्याप्त खर्च होता है। ऐसे में वर्तमान भरण-पोषण राशि उनके सम्मानजनक जीवनयापन और चिकित्सा खर्चों के लिए पर्याप्त नहीं है।

पति ने अतिरिक्त खर्चों का दिया हवाला

वहीं, पति की ओर से अदालत में कहा गया कि वह अपनी बेटी की शिक्षा, ट्यूशन फीस, परिवहन व्यय, ऋण की मासिक किस्तों तथा बीमा प्रीमियम सहित कई आर्थिक जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। इसलिए भरण-पोषण की राशि बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं बनता।

अदालत ने कहा—सम्मानपूर्वक जीवन के लिए पर्याप्त भरण-पोषण जरूरी

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी को ऐसा भरण-पोषण मिलना चाहिए जिससे वह सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत कर सके। न्यायालय ने माना कि पति की आय, पत्नी की चिकित्सा आवश्यकताओं और मामले के समग्र तथ्यों को देखते हुए 9,000 रुपये प्रतिमाह की राशि पर्याप्त नहीं है।

इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने मासिक भरण-पोषण को बढ़ाकर 14,000 रुपये प्रतिमाह करने का आदेश दिया।

अगस्त 2026 से लागू होगा आदेश

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि बढ़ी हुई भरण-पोषण राशि अगस्त 2026 से प्रभावी होगी। साथ ही पति को निर्देश दिया गया कि वह प्रत्येक माह की 10 तारीख तक यह राशि पत्नी को नियमित रूप से अदा करेगा।

भुगतान नहीं होने पर पत्नी को मिलेगी कानूनी कार्रवाई का अधिकार

अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि पति लगातार दो माह तक भरण-पोषण राशि का भुगतान नहीं करता, तो पत्नी कानून के अनुसार आदेश के निष्पादन (Execution) की कार्रवाई शुरू कर सकती है।

इसके अतिरिक्त पत्नी संबंधित विभाग से यह अनुरोध भी कर सकेगी कि भरण-पोषण की राशि पति के वेतन से सीधे काटकर उसे उपलब्ध कराई जाए, ताकि न्यायालय के आदेश का प्रभावी पालन सुनिश्चित हो सके।

महत्वपूर्ण माना जा रहा है फैसला

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तराखंड हाईकोर्ट का यह निर्णय भरण-पोषण से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस फैसले में न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि भरण-पोषण का उद्देश्य केवल न्यूनतम आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि पत्नी को उसकी परिस्थितियों के अनुरूप सम्मानजनक जीवनयापन सुनिश्चित करना भी है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि भरण-पोषण की राशि निर्धारित करते समय पति की आय के साथ-साथ पत्नी की स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं और वास्तविक जीवन-यापन की जरूरतों को भी समान रूप से महत्व दिया जाना चाहिए।

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