उत्तरकाशी। उत्तरकाशी जनपद के धराली क्षेत्र में 5 अगस्त 2025 को आई विनाशकारी आपदा को बुधवार को एक वर्ष पूरा हो गया। पिछले वर्ष इसी दिन खीरगंगा (खेरागाड़ बेसिन) में आए भीषण फ्लैश फ्लड ने धराली बाजार को पलभर में मलबे में तब्दील कर दिया था। इस भीषण त्रासदी में 70 लोगों की जान चली गई, जबकि कई लोग आज भी लापता हैं। एक वर्ष बीत जाने के बावजूद आपदा की भयावह यादें आज भी ग्रामीणों के मन में ताजा हैं।
आपदा की पहली बरसी पर धराली और आसपास के क्षेत्रों के लोगों ने दिवंगतों की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। ग्रामीणों ने खीरगंगा में आए मलबे की चपेट में जान गंवाने वाले धराली गांव के आठ लोगों सहित कुल 70 मृतकों की आत्मा की शांति के लिए एक दिवसीय पाठ-पूजा कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धांजलि स्वरूप आपदा स्थल पर 101 पौधों का पौधरोपण भी किया गया। ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि प्रत्येक वर्ष 5 अगस्त को इसी स्थान पर पौधरोपण कर दिवंगतों को श्रद्धांजलि दी जाएगी, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस त्रासदी को याद रखें और प्रकृति संरक्षण का संदेश भी समाज तक पहुंचे।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दिवंगतों को दी श्रद्धांजलि
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान पांच विद्वान पंडितों ने रुद्राष्टक, पितृ शांति पाठ तथा श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ कर दिवंगत आत्माओं की शांति की प्रार्थना की। पूरे वातावरण में शोक और संवेदना का भाव स्पष्ट दिखाई दिया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों की आंखें उस भयावह दिन की यादों से नम हो गईं।
ग्रामीणों ने कहा कि एक वर्ष बीत जाने के बाद भी कई परिवार अपने प्रियजनों के अंतिम दर्शन तक नहीं कर सके। जिन लोगों के परिजन आज भी लापता हैं, उनके लिए समय भले ही आगे बढ़ गया हो, लेकिन दर्द आज भी वैसा ही है। उनके अनुसार, यह त्रासदी केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं थी, बल्कि कई परिवारों की पूरी दुनिया उजड़ गई।
एक झटके में उजड़ गए घर, होटल, दुकानें और आजीविका
धराली आपदा ने क्षेत्र के अनेक परिवारों की वर्षों की मेहनत को पलभर में खत्म कर दिया। कई लोगों के घर, होटल, दुकानें, सेब के बगीचे और आजीविका के साधन मलबे में समा गए। बड़ी संख्या में परिवार बेघर हो गए और आज भी कई प्रभावित परिवार सामान्य जीवन में लौटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
करीब 30 परिवार आज भी किराए के मकानों या अपने रिश्तेदारों के यहां रहने को मजबूर हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि सरकार से आर्थिक सहायता तो मिली है, लेकिन स्थायी पुनर्वास की प्रक्रिया जल्द पूरी होना बेहद आवश्यक है, ताकि वे फिर से अपने जीवन की नई शुरुआत कर सकें।
पुनर्वास कार्य अंतिम चरण में, प्रशासन ने दी जानकारी
प्रशासन के अनुसार, प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया लगातार जारी है। अब तक 21 परिवारों के पुनर्वास के लिए भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है। वहीं 66 प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, जबकि शेष 25 परिवारों के मामलों में भी जल्द आवश्यक कार्रवाई पूरी की जाएगी।
फिर संभल रहा है धराली, बागवानी और पर्यटन से लौट रही उम्मीद
भीषण आपदा के बाद धराली के लोग धीरे-धीरे अपने जीवन को फिर से पटरी पर लाने का प्रयास कर रहे हैं। क्षेत्र में सेब बागवानी और नकदी फसलों की खेती एक बार फिर लोगों की आजीविका का प्रमुख आधार बन रही है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि खीरगंगा के किनारे दोबारा होटल और बड़े व्यवसाय शुरू करना अभी भी जोखिम भरा है।
ग्रामीणों का मानना है कि यदि नदी के किनारों पर मजबूत सुरक्षा कार्य और प्रभावी आपदा सुरक्षा उपाय किए जाएं, तो खेती, बागवानी और पर्यटन गतिविधियों को सुरक्षित रूप से दोबारा विकसित किया जा सकता है।
धराली के युवाओं ने भी कठिन परिस्थितियों के बावजूद हार नहीं मानी है। कई युवतियां परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी संभालने के लिए ट्रेकिंग, पर्यटन और स्वरोजगार से जुड़े कार्यों में आगे आई हैं। वहीं जिन लोगों के होटल और दुकानें सुरक्षित बच गई थीं, उन्होंने दोबारा अपने व्यवसाय शुरू करने की दिशा में प्रयास तेज कर दिए हैं।
दर्द रहेगा, लेकिन धराली फिर बसेगा
आपदा प्रभावित लोगों का कहना है कि अपनों को खोने का दर्द जीवनभर नहीं भुलाया जा सकता। फिर भी उन्होंने उसी पीड़ा को अपनी ताकत बनाकर धराली को दोबारा बसाने और संवारने का संकल्प लिया है। ग्रामीणों के अनुसार, यह बरसी केवल शोक मनाने का दिन नहीं, बल्कि संघर्ष, साहस, संकल्प और नई उम्मीद का प्रतीक भी है।
5 अगस्त 2025 की वह भयावह त्रासदी
गौरतलब है कि 5 अगस्त 2025 को धराली क्षेत्र के खेरागाड़ बेसिन (खीरगंगा) में अचानक आए फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई थी। इस आपदा में धराली बाजार का बड़ा हिस्सा पूरी तरह नष्ट हो गया था। होटल, मकान, दुकानें, सेब के बगीचे और अन्य संपत्तियां मलबे में दब गई थीं। कल्पेश्वर मंदिर भी मलबे के नीचे दब गया था और बाढ़ के साथ आया मलबा लगभग दो लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में फैल गया था।
इस विनाशकारी आपदा में 70 लोगों की मृत्यु हुई, जबकि 18 लोग घायल हुए। इनमें 5 सामान्य और 13 गंभीर घायल शामिल थे।
सरकार ने दी आर्थिक सहायता
आपदा के बाद राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों को राहत प्रदान करने के लिए विभिन्न स्तरों पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई। मृतकों के आश्रितों को एसडीआरएफ मानकों के अनुसार 4 लाख रुपये तथा मुख्यमंत्री राहत कोष से 1 लाख रुपये प्रति परिवार की अतिरिक्त सहायता दी गई।
इसके अलावा 115 पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त आवासीय भवनों के स्वामियों को 5-5 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई। प्रभावित होटल स्वामियों को अब तक 6 करोड़ 83 लाख 73 हजार 848 रुपये से अधिक की सहायता वितरित की जा चुकी है।
वहीं आपदा में बेघर हुए 115 परिवारों को छह माह तक 4 हजार रुपये प्रतिमाह की दर से 24 हजार रुपये प्रति परिवार किराया सहायता भी उपलब्ध कराई गई, ताकि पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी होने तक उन्हें रहने में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।