देहरादून। देहरादून पुलिस ने खुद को आईपीएस अधिकारी और विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक शातिर जालसाज को गिरफ्तार किया है। एसएसपी देहरादून की रणनीति के तहत थाना राजपुर पुलिस ने आरोपी को मसूरी रोड स्थित सीएसआई तिराहे से दबोच लिया। आरोपी के कब्जे से फर्जी आईडी कार्ड, विजिटिंग कार्ड, पुलिस और सेना की वर्दियां, वायरलेस सेट और लैपटॉप सहित कई आपत्तिजनक सामान बरामद हुए हैं।
वरिष्ठ अधिकारी का बेटा निकला फर्जी IPS
गिरफ्तार आरोपी की पहचान आर. यशोवर्धन (35 वर्ष) पुत्र एस. रामास्वामी, निवासी ऑफिसर्स रेजिडेंशियल कॉलोनी, आईएचएम कैंपस, गढ़ी कैंट, देहरादून के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार आरोपी एक वरिष्ठ सेवानिवृत्त अधिकारी का बेटा है। पूछताछ में उसने बताया कि उसका सपना आईपीएस अधिकारी बनने का था और उसने कई वर्षों तक यूपीएससी की तैयारी भी की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उसने फर्जी आईपीएस अधिकारी बनकर लोगों को ठगना शुरू कर दिया।
15 लाख रुपये की पहली शिकायत
8 जुलाई 2026 को डाकरा बाजार निवासी अंशुल उपाध्याय ने थाना राजपुर में शिकायत दर्ज कराई कि यशोवर्धन ने खुद को वरिष्ठ अधिकारी बताते हुए होटल जिंजर, देहरादून में बुलाया और उनकी दिवंगत माता के नाम पर कंपनी का जल्द पंजीकरण कराने का झांसा देकर 15 लाख रुपये ठग लिए। इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।
रक्षा मंत्रालय में नौकरी दिलाने के नाम पर 4.60 लाख की ठगी
इसके बाद 15 जुलाई को डॉ. अनुषा, निवासी सोशल स्टेज हॉस्टल, कैनाल रोड ने भी थाना राजपुर में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि यशोवर्धन ने खुद को आईपीएस अधिकारी बताते हुए फर्जी आईडी और विजिटिंग कार्ड दिखाए तथा रक्षा मंत्रालय में डेटा साइंस कंसल्टेंट की नौकरी दिलाने का झांसा देकर 4.60 लाख रुपये हड़प लिए।
एसएसपी के निर्देश पर बनी विशेष टीम
दोनों मामलों की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी देहरादून ने तत्काल गिरफ्तारी के निर्देश दिए। थाना राजपुर पुलिस ने विशेष टीम गठित कर घटनास्थलों का निरीक्षण किया, सीसीटीवी फुटेज खंगाले और तकनीकी साक्ष्य जुटाए। जांच के बाद गुरुवार को आरोपी को सीएसआई तिराहा, मसूरी रोड से गिरफ्तार कर लिया गया।
पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा
पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह लोगों पर प्रभाव जमाने के लिए खुद को कभी आईपीएस अधिकारी, कभी रॉ एजेंट, कभी सीआरपीएफ अधिकारी, तो कभी सेना का वरिष्ठ अधिकारी बताता था। उसने फर्जी पहचान पत्र, विजिटिंग कार्ड और वर्दियां तैयार कर रखी थीं। इन्हीं के दम पर वह नौकरी दिलाने, टेंडर पास कराने और सरकारी काम जल्दी कराने का झांसा देकर लोगों से लाखों रुपये ऐंठता था।
ये सामान हुआ बरामद
पुलिस ने आरोपी के पास से बड़ी मात्रा में फर्जी सरकारी सामग्री बरामद की है, जिनमें—
5 फर्जी पहचान पत्र (आईडी कार्ड)
8 फर्जी विजिटिंग कार्ड
पुलिस एवं सेना के 25 लोगो (Emblems)
सेना/पैरामिलिट्री की 3 जोड़ी वर्दियां
3 फर्जी रिबन
1 वायरलेस सेट
1 लैपटॉप
पुराने मामलों की भी होगी जांच
पुलिस का कहना है कि आरोपी लंबे समय से लोगों को अपना शिकार बना रहा था। अब यह जांच की जा रही है कि उसने अब तक कितने लोगों से ठगी की है और उसके खिलाफ अन्य जिलों या राज्यों में भी मामले दर्ज हैं या नहीं। पुलिस अन्य संभावित पीड़ितों से भी संपर्क कर रही है।
देहरादून पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति के सरकारी अधिकारी होने के दावे पर बिना सत्यापन भरोसा न करें। यदि कोई नौकरी, टेंडर या सरकारी कार्य जल्दी कराने के नाम पर पैसे मांगता है तो इसकी तत्काल सूचना पुलिस को दें।