गणेश गोदियाल ने बीकेटीसी अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग की, कहा—अपने ऊपर लगे आरोपों से ध्यान हटाने के लिए मेरे कार्यकाल को घसीटा जा रहा है; विधानसभा की जांच समिति बनाने की मांग दोहराई
देहरादून। बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की कथित हेराफेरी का मामला अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एवं बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के पूर्व अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मंगलवार को देहरादून प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान बीकेटीसी अध्यक्ष अपने कार्यकाल में उठे गंभीर सवालों से ध्यान हटाने के लिए उनके कार्यकाल पर बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं।
गोदियाल ने कहा कि यदि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों में कोई सच्चाई है तो उन्हें साबित करना सरकार और जांच एजेंसियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि तथ्यों के बजाय राजनीतिक आरोप लगाकर मूल मुद्दे से ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है।
‘प्रमोद नौटियाल मेरे कार्यकाल में उस जिम्मेदारी पर नहीं था’
गणेश गोदियाल ने कहा कि चढ़ावा हेराफेरी मामले में गिरफ्तार कर्मचारी प्रमोद नौटियाल उनके कार्यकाल के दौरान चढ़ावे की गणना संबंधी जिम्मेदारी पर तैनात नहीं था। उन्होंने बताया कि उसकी नियुक्ति वर्ष 2003 में हुई थी और यदि उसके खिलाफ पहले भी कोई जांच हुई थी तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पूर्व में जांच हुई थी तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई और अब तक संबंधित रिपोर्ट सामने क्यों नहीं लाई गई।
‘सरकार दोषियों को बचाने की कोशिश कर रही है’
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इस पूरे मामले में वास्तविक दोषियों को बचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार निष्पक्ष जांच चाहती है तो विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की अध्यक्षता में एक सर्वदलीय जांच समिति गठित की जाए, ताकि पूरे मामले की पारदर्शी जांच हो सके।
उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही वह स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग करते रहे हैं और सरकार को इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
बीकेटीसी अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग
प्रेस वार्ता में गणेश गोदियाल ने बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के इस्तीफे की भी मांग की। उनका कहना था कि वर्तमान अध्यक्ष अपने कार्यकाल में सामने आए विवादों की जिम्मेदारी लेने के बजाय पुराने मामलों को उठाकर अपनी जवाबदेही से बचने का प्रयास कर रहे हैं।
गोदियाल ने आरोप लगाया कि इस पूरे विवाद में उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया है, जिसके लिए उन्होंने बीकेटीसी अध्यक्ष और राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
खुली बहस की चुनौती
प्रेस वार्ता के दौरान गणेश गोदियाल ने अपने बगल में रखी खाली कुर्सी की ओर इशारा करते हुए कहा कि उन्होंने बीकेटीसी अध्यक्ष को खुली चर्चा के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन वे नहीं आए। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में हेमंत द्विवेदी किसी भी मंच पर आमने-सामने चर्चा के लिए बुलाते हैं तो वह वहां भी जाने के लिए तैयार हैं, बशर्ते उन्हें पहले से सूचना दी जाए।
उनका कहना था कि सार्वजनिक मंच पर तथ्यों के आधार पर चर्चा होने से पूरे मामले की वास्तविकता सामने आएगी।
बिनसर मंदिर निर्माण को लेकर भी दी सफाई
गणेश गोदियाल ने अपने बीकेटीसी अध्यक्ष कार्यकाल के दौरान बिनसर मंदिर के निर्माण कार्य को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण कोई अनैतिक कार्य नहीं था। यह निर्णय बीकेटीसी बोर्ड की बैठक में विधिवत प्रस्ताव पारित होने के बाद लिया गया था और उस समय बोर्ड में अधिकांश सदस्य तत्कालीन भाजपा सरकार द्वारा नामित थे।
उन्होंने बताया कि बिनसर स्थित प्राचीन मंदिर की स्थिति जर्जर हो चुकी थी और स्थानीय लोगों की मांग पर उसके जीर्णोद्धार का निर्णय लिया गया था। बाद में सत्ता परिवर्तन के बाद वन विभाग के माध्यम से निर्माण कार्य रुकवा दिया गया, जबकि उस समय तक लगभग 9 लाख रुपये खर्च हो चुके थे और पूरी परियोजना का अनुमानित बजट करीब ढाई से तीन करोड़ रुपये था।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच जांच पर टिकी निगाहें
बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की कथित हेराफेरी को लेकर पुलिस जांच जारी है और मामले में एक आरोपी कर्मचारी की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। वहीं दूसरी ओर, इस प्रकरण को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। कांग्रेस निष्पक्ष एवं व्यापक जांच की मांग कर रही है, जबकि सरकार का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब इस पूरे मामले में पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ राजनीतिक बयानबाजी भी लगातार तेज होती जा रही है।