बदरीनाथ चढ़ावा विवाद पर महेंद्र भट्ट का बयान, बोले—‘पुजारी और पंडा चोरी नहीं करते, कर्मचारी हो सकते हैं जिम्मेदार’

चढ़ावा गणना के लिए बिना जेब वाले वस्त्र पहनने की प्रस्तावित व्यवस्था पर भी रखी राय, कहा—कर्मचारियों पर लागू हो नीति, पुजारियों की आस्था और परंपरा पर सवाल नहीं उठने चाहिए

गोपेश्वर/देहरादून। बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामले को लेकर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य महेंद्र भट्ट का बयान चर्चा में है। उन्होंने कहा कि मंदिरों के ब्राह्मण, पुजारी और पंडा कभी चोरी नहीं करते, जबकि यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी जिम्मेदारी मंदिर समिति के कर्मचारियों की हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

महेंद्र भट्ट का यह बयान उस समय आया है जब बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की गणना के दौरान कथित वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आने के बाद मंदिर समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं और पुलिस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है।

‘पुजारियों पर सदियों से श्रद्धालुओं का विश्वास’

महेंद्र भट्ट ने कहा कि ब्राह्मण, पुजारी और पंडों की भूमिका मंदिर की धार्मिक परंपराओं से जुड़ी होती है। श्रद्धालु उन्हें अपनी इच्छा से दक्षिणा देते हैं और समाज में उनके प्रति विश्वास की लंबी परंपरा रही है। ऐसे में उन्हें संदेह के दायरे में रखना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि यदि चढ़ावे में किसी प्रकार की हेराफेरी हुई है तो उसमें मंदिर समिति के कर्मचारी जिम्मेदार हो सकते हैं। जांच एजेंसियों को तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए और दोषी चाहे कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाना चाहिए।

बिना जेब वाले वस्त्रों की एसओपी पर दी प्रतिक्रिया

चढ़ावा हेराफेरी के आरोप सामने आने के बाद बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने चढ़ावे की गणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने की बात कही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत चढ़ावे की गणना करने वाले कर्मचारियों को बिना जेब वाले वस्त्र पहनकर मंदिर परिसर में प्रवेश कराने का सुझाव दिया गया है, ताकि किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना को रोका जा सके।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए महेंद्र भट्ट ने कहा कि यदि ऐसी व्यवस्था कर्मचारियों के लिए बनाई जाती है तो उसमें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन इस नीति को पुजारियों और पंडों पर लागू करना उचित नहीं होगा, क्योंकि वे धार्मिक परंपरा का हिस्सा हैं और उन पर श्रद्धालुओं का वर्षों से अटूट विश्वास रहा है।

प्रमोद नौटियाल पर लगे हैं गंभीर आरोप

गौरतलब है कि इस मामले में मंदिर समिति के कर्मचारी प्रमोद नौटियाल पर चढ़ावे की गणना के दौरान नोटों की गड्डियां और सोने-चांदी के उपहारों में कथित हेराफेरी के आरोप लगे हैं। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित हेराफेरी में अन्य लोगों की भी भूमिका थी या नहीं।

जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें

बदरीनाथ धाम से जुड़े इस बहुचर्चित मामले में पुलिस और संबंधित एजेंसियां वित्तीय रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही हैं। वहीं, महेंद्र भट्ट के बयान ने इस बहस को नई दिशा दे दी है कि धार्मिक परंपराओं से जुड़े पुजारियों और मंदिर प्रशासनिक व्यवस्था में कार्यरत कर्मचारियों की जिम्मेदारियों को अलग-अलग दृष्टि से देखा जाना चाहिए। अब पूरे मामले में पुलिस जांच और उसके निष्कर्षों पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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