नरेंद्र नगर स्थित टिहरी राजदरबार में मंगलवार से भगवान बदरी विशाल की पूजा-अर्चना से जुड़े पारंपरिक अनुष्ठानों की शुरुआत हो गई है। इस अवसर पर सुहागिन महिलाओं ने विधि-विधान के साथ तिलों का पवित्र तेल पिरोकर आस्था और परंपरा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।
इस धार्मिक आयोजन में टिहरी राजपरिवार की सदस्य माला राज्य लक्ष्मी शाह सहित कई महिलाओं ने भाग लिया और पारंपरिक तरीके से मूसल, ओखली और सिलबट्टे की सहायता से तिल का तेल तैयार किया। यह तेल भगवान बदरी विशाल के नित्य महाभिषेक में प्रयोग किया जाएगा।
कल से शुरू होगी गाडू घड़ा कलश यात्रा
डिमरी पुजारी समुदाय के अध्यक्ष आशुतोष डिमरी के अनुसार, 8 अप्रैल से पवित्र “गाडू घड़ा कलश यात्रा” का शुभारंभ होगा। इस यात्रा में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की उपस्थिति से आयोजन का धार्मिक महत्व और बढ़ जाएगा।
यह कलश यात्रा नरेंद्र नगर से भव्य शोभायात्रा के साथ रवाना होकर विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए 22 अप्रैल को बदरीनाथ धाम पहुंचेगी।
23 अप्रैल को खुलेंगे कपाट
इस वर्ष बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को सुबह 6:15 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। कपाट खुलने के साथ ही इस पवित्र तिल के तेल से भगवान बदरी विशाल का अभिषेक किया जाएगा और इसे मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा।
धार्मिक मान्यता है कि इसी तेल से पूरे वर्ष भगवान की पूजा-अर्चना होती है और अखंड ज्योति भी प्रज्वलित रहती है।
मौसम भी बना आस्था का साक्षी
कार्यक्रम के दौरान सुबह हल्की बूंदाबांदी हो रही थी, लेकिन जैसे ही राजपुरोहित कृष्ण प्रसाद उनियाल द्वारा विधिवत पूजा संपन्न कराई गई, मौसम साफ हो गया। श्रद्धालुओं ने इसे भगवान बदरी विशाल की कृपा मानते हुए हर्ष और आस्था के साथ इस अनुष्ठान में भाग लिया।