देहरादून: उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने कोटद्वार में हुए बवाल से जुड़े मामले में याचिकाकर्ता दीपक कुमार उर्फ ‘मो. दीपक’ की याचिका को निस्तारित कर दिया है।
न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता को जांच में पुलिस का सहयोग करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अदालत ने उन्हें अनावश्यक रूप से सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखने की सलाह दी, ताकि जांच प्रभावित न हो।
याचिकाकर्ता की दलील
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे में पुलिस ने उचित कार्रवाई नहीं की। उनका कहना था कि दीपक कुमार घटना के दौरान भीड़ को शांत करने पहुंचे थे, लेकिन पुलिस ने उल्टा उन्हीं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया।
सरकार का पक्ष
वहीं, सरकार की ओर से कहा गया कि घटना के समय दीपक मौके पर मौजूद थे और भीड़ के साथ धक्का-मुक्की में शामिल थे। पुलिस ने उन्हें और 22 अन्य लोगों को चिन्हित कर मुकदमा दर्ज किया है, जिसकी जांच जारी है।
क्या है पूरा मामला
मामला 26 जनवरी को कोटद्वार में हुए विवाद से जुड़ा है, जहां बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ताओं ने एक मुस्लिम दुकानदार की दुकान के नाम को लेकर आपत्ति जताई थी। इसी दौरान दीपक कुमार ने दुकानदार का समर्थन किया और उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें उन्होंने अपना नाम “मोहम्मद दीपक” बताया।
वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें कुछ लोगों का समर्थन भी मिला, जबकि 28 जनवरी को उनके खिलाफ दुर्व्यवहार, धमकी और मोबाइल छीनने जैसे आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया।
अदालत का फैसला
सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए निस्तारित कर दिया और फिलहाल याचिकाकर्ता को कोई राहत नहीं दी।