मकर संक्रांति पर खुले आदि बदरीनाथ धाम के कपाट, अभय मुद्रा में भगवान नारायण के हुए दर्शन

कर्णप्रयाग (चमोली)। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर सप्त बदरी में प्रथम आदि बदरीनाथ धाम (Aadi Badrinath) के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ बुधवार सुबह 5:30 बजे विधि-विधान के साथ खोल दिए गए। कपाट खुलते ही मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में गूंज उठा और श्रद्धालुओं ने भगवान नारायण के अभय मुद्रा में शृंगार दर्शन किए।

कपाट खुलने के साथ ही मंदिर में सात दिवसीय महाभिषेक समारोह एवं श्रीमद्भागवत सप्ताह का शुभारंभ भी हो गया। परंपरा के अनुसार पौष माह में आदि बदरी मंदिर समूह के कपाट एक माह के लिए बंद रहते हैं और मकर संक्रांति पर पुनः दर्शन के लिए खोले जाते हैं।

भव्य सजावट और धार्मिक अनुष्ठान

आदि बदरीनाथ मंदिर को इस अवसर पर दो क्विंटल गेंदे के फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है। मंदिर की आकर्षक सजावट श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

मंदिर के पुजारी चक्रधर थपलियाल ने बताया कि कर्णप्रयाग–गैरसैंण हाईवे पर स्थित इस प्राचीन धाम के कपाट खोलने को लेकर सभी तैयारियां पूर्व में ही पूरी कर ली गई थीं।

श्रीमद्भागवत सप्ताह और सांस्कृतिक कार्यक्रम

मंदिर समिति के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद बहुगुणा ने जानकारी दी कि कपाट खुलने के साथ ही सात गढ़वाल मंडल कीर्तन मंडप में श्रीमद्भागवत सप्ताह का भी विधिवत शुभारंभ हुआ।

उन्होंने बताया कि सुबह 11 बजे गढ़वाल स्काउट बैंड की मधुर धुनों के बीच जिला पंचायत चमोली के अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट द्वारा महाभिषेक समारोह का उद्घाटन किया जाएगा।

महिला मंगल दलों की प्रस्तुतियां

समारोह के प्रथम दिन क्षेत्र के महिला मंगल दलों द्वारा धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी जाएंगी, जिससे पूरे क्षेत्र में आस्था और उल्लास का वातावरण बना हुआ है।

मकर संक्रांति के अवसर पर आदि बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की उपस्थिति से यह धाम एक बार फिर आस्था, परंपरा और संस्कृति का जीवंत केंद्र बन गया है।

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