उत्तराखंड में खाद्य तेल के री-यूज़ पर सख्ती: धामी सरकार ने RUCO मिशन को बनाया राष्ट्रीय मॉडल

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अगुवाई में उत्तराखंड सरकार ने खाद्य सुरक्षा और जन-स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए खाद्य तेल के ‘री-यूज़’ पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है। तेजी से बदलती लाइफस्टाइल, फूड डिलीवरी ऐप्स की बढ़ती लोकप्रियता और रेडी-टू-ईट कल्चर के बीच बाजार के खाने पर निर्भरता बढ़ी है, जिससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। विशेष रूप से होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में एक बार उपयोग किए गए तेल का पुनः उपयोग एक आम प्रवृत्ति बन चुका है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।

बार-बार गर्म किए गए तेल से बढ़ता है बीमारी का खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार, तेल को दुबारा गर्म करने से उसमें एल्डिहाइड्स और अन्य हानिकारक यौगिक बनने लगते हैं, जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और हृदय रोग, कैंसर, उच्च ट्रांस फैट, उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों के जोखिम को कई गुना बढ़ा देते हैं।
2018 में FSSAI ने इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए RUCO (Repurpose Used Cooking Oil) मिशन लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य इस्तेमाल हुए तेल को खाद्य श्रृंखला में वापस जाने से रोककर उसे बायोफ्यूल जैसे सुरक्षित गैर-खाद्य उपयोगों में बदलना है।

उत्तराखंड बना देश का अग्रणी राज्य

अपर आयुक्त FDA ताजबर सिंह जग्गी बताते हैं कि 2019 में RUCO मॉडल के तहत जहां शुरुआती चरण में मात्र 600 लीटर यूज्ड कुकिंग ऑयल एकत्र किया गया था, वहीं पिछले पांच वर्षों में यह मात्रा बढ़कर 1,06,414 किलो तक पहुंच गई। यह रिकॉर्ड उपलब्धि दर्शाती है कि उत्तराखंड ने इस मिशन को पूरी गंभीरता से अपनाया और जमीनी स्तर पर सफलतापूर्वक लागू किया।

स्वास्थ्य सचिव और आयुक्त FDA, डॉ. आर. राजेश कुमार के नेतृत्व में राज्य में बड़े पैमाने पर अभियान चलाए गए। फूड बिजनेस ऑपरेटरों, होटल-रेस्टोरेंट संचालकों, एग्रीगेटर्स, छात्रों, स्वयंसेवी संस्थाओं और मीडिया को जोड़ते हुए इसे एक सामाजिक आंदोलन का रूप दिया गया।
इसमें कैफे-टॉक्स, प्रशिक्षण कार्यशालाएं, जागरूकता कार्यक्रम, मीडिया संवाद जैसे अनेक नवाचार शामिल रहे।

चारधाम यात्रा 2025 को भी जोड़ा गया मिशन से

2025 की चारधाम यात्रा को विशेष थीम के साथ RUCO अभियान से जोड़ा गया। यात्रा मार्ग पर सभी खाद्य कारोबारियों को तेल के पुनः उपयोग रोकने के लिए प्रशिक्षित किया गया।
इस अवधि में लगभग 1,200 किलो इस्तेमाल किया गया तेल एकत्र कर इसे बायोफ्यूल में परिवर्तित किया गया—जो स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।

Doon Model की राष्ट्रीय सराहना

FSSAI के CEO ने भी उत्तराखंड के Doon Model की सराहना की है, जिसे अब गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों में चरणबद्ध विस्तार दिया जा रहा है।
इस मॉडल का उद्देश्य—

  • खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता को बढ़ावा देना

  • यूज्ड कुकिंग ऑयल के सुरक्षित पुनर्चक्रण को सुनिश्चित करना

  • फूड बिजनेस सेक्टर को वैज्ञानिक और सुरक्षित व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करना

इस अभियान को सफल बनाने में उप आयुक्त एवं नोडल अधिकारी (Eat Right India – RUCO Initiative) गणेश कंडवाल की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही।

सरकार का कड़ा संदेश—स्वास्थ्य के साथ समझौता नहीं

राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
अगले चरण में—

  • तकनीकी निगरानी बढ़ेगी,

  • संग्रहण केंद्रों का विस्तार होगा,

  • और बायोफ्यूल उत्पादन क्षमता में वृद्धि की जाएगी।

RUCO मिशन को एक सख्त नियम नहीं, बल्कि जन-स्वास्थ्य सुरक्षा का संकल्प बताते हुए राज्य सरकार ने कहा है कि “एक बार इस्तेमाल हुआ तेल किसी हालत में खाद्य श्रृंखला में वापस नहीं लौटेगा”

उत्तराखंड ने न केवल RUCO को सफल बनाया है, बल्कि इसे एक सामाजिक जागरूकता अभियान में बदलकर देश के सामने एक नया मानक स्थापित किया है।
राज्य का लक्ष्य है—स्वस्थ उत्तराखंड, सुरक्षित भोजन और पर्यावरण-सुरक्षित भविष्य।

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