IFS रंजन कुमार मिश्र को उत्तराखंड वन विभाग की कमान, राज्य के नए हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स नियुक्त

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्य के वन विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 1993 बैच के भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी रंजन कुमार मिश्र को उत्तराखंड का नया प्रमुख वन संरक्षक (PCCF) एवं हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स (HoFF) नियुक्त किया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद शासन ने उनके पदोन्नयन का आदेश जारी कर दिया है। इसके साथ ही उन्हें सर्वोच्च वेतनमान लेवल-17 (₹2,25,000) में तैनाती दी गई है।

पूर्व PCCF समीर सिन्हा के सेवानिवृत्ति के बाद संभालेंगे कमान

मिश्र इससे पहले उत्तराखंड में प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) की जिम्मेदारी संभाल रहे थे और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में कई अहम पहलों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। पूर्व PCCF समीर सिन्हा के सेवानिवृत्त होने के बाद विभाग में शीर्ष पद खाली था, जिसे अब मिश्र संभालेंगे। उनकी नियुक्ति पर विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने स्वागत व्यक्त किया है।

वन संरक्षण और पर्यावरणीय परियोजनाओं में लंबा अनुभव

रंजन कुमार मिश्र भारतीय वन सेवा के अनुभवी अधिकारियों में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर के दौरान वन्यजीव प्रबंधन, जंगलों की सुरक्षा, संवेदनशील पारिस्थितिकी क्षेत्रों के संरक्षण और भविष्य उन्मुख पर्यावरणीय परियोजनाओं पर निरंतर कार्य किया है।
उनके द्वारा संचालित कई प्रोजेक्ट न केवल राज्य में बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहे गए हैं।

वन विभाग में नई ऊर्जा और नीतिगत सुधार की उम्मीद

उत्तराखंड एक संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र वाला हिमालयी राज्य है, जहां जंगलों का संरक्षण, वनाग्नि नियंत्राण, मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करना, जैव विविधता की रक्षा और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी चुनौतियां प्रमुख हैं।
ऐसे में मिश्र की नियुक्ति को विभाग में नई दिशा, बेहतर प्रबंधन और व्यावहारिक नीतिगत सुधारों के रूप में देखा जा रहा है।
वन विभाग के सूत्रों का मानना है कि उनकी नेतृत्व क्षमता, जमीनी समझ और तकनीकी अनुभव से विभाग को अधिक सशक्त और परिणामकारी बनाने में मदद मिलेगी।

कई महत्वपूर्ण पहलें सम्भावित

सूत्रों के अनुसार, मिश्र के कार्यकाल में निम्न क्षेत्रों में तेजी देखी जा सकती है—

  • वनाग्नि प्रबंधन की उन्नत रणनीति

  • आधुनिक तकनीक का उपयोग (ड्रोन, GIS, सैटेलाइट मॉनिटरिंग)

  • वन्यजीव संरक्षण को और मजबूत करना

  • जैव विविधता परियोजनाओं का विस्तार

  • मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए बेहतर नीतियाँ

  • पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सामुदायिक कार्यक्रम

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