प्रतिबंधित मांस प्रकरण में फरार बीजेपी नेता मदन जोशी ने दिया चौंकाने वाला समर्पण – स्कूटी से पहुंचकर पुलिस को दिया धोखा, हाईकोर्ट ने खारिज की थी जमानत
रामनगर: कथित प्रतिबंधित मांस प्रकरण में फरार चल रहे मुख्य आरोपी और हिंदूवादी नेता मदन जोशी ने मंगलवार को अचानक रामनगर कोतवाली में आत्मसमर्पण कर दिया। लंबे समय से उनकी तलाश में जुटी पुलिस पूरी तरह तैयार थी, लेकिन जोशी पुलिस की आंखों में धूल झोंकते हुए अलग रास्ते से स्कूटी पर सवार होकर सीधे कोतवाली पहुंच गए और खुद को पुलिस के हवाले कर दिया।
पुलिस की तैयारी पर लगा ब्रेक
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस को इनपुट मिला था कि मदन जोशी आत्मसमर्पण करने आ सकते हैं। इसी वजह से कोतवाली के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था और गिरफ्तारी की रणनीति बनाई जा चुकी थी। हालांकि, जोशी के अचानक अंदर पहुंचने से पुलिस को भनक तक नहीं लगी और आत्मसमर्पण की सूचना मिलते ही पुलिसकर्मी कोतवाली के भीतर सक्रिय हो गए।
घटना की जानकारी फैलते ही कोतवाली में भाजपा कार्यकर्ताओं, स्थानीय नेताओं और समर्थकों की भीड़ उमड़ पड़ी। कुछ ही देर बाद विधायक दीवान सिंह बिष्ट भी मौके पर पहुंचे।
विधायक का बयान और राजनीतिक तापमान
विधायक दीवान सिंह बिष्ट ने कहा कि मदन जोशी भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता हैं और नगर में मंडल अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि—
-
जोशी ने हमेशा कानून का सम्मान किया
-
अदालत के निर्देशों का पालन करते हुए उन्होंने स्वेच्छा से समर्पण किया
इससे पहले मदन जोशी ने एक वीडियो जारी कर खुद को निर्दोष बताते हुए मामले को राजनीतिक साजिश बताया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके परिवार को प्रताड़ित किया और जिन नामों की जानकारी उन्होंने पुलिस को दी, उनकी अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई।
क्या है पूरा मामला
23 अक्टूबर को रामनगर के छोई इलाके में बरेली से मीट लेकर जा रहे पिकअप चालक नासिर हुसैन पर भीड़ ने हमला किया था। घटना में:
-
नासिर की जमकर पिटाई की गई
-
पिकअप वाहन में तोड़फोड़ की गई
-
नासिर गंभीर रूप से घायल हुआ
नासिर की पत्नी नूरजहां की तहरीर पर पुलिस ने गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया था। अब तक करीब 15 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जिनमें 5 नामजद आरोपी शामिल हैं।
जमानत खारिज होने के बाद बढ़ा दबाव
बीते सोमवार को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मदन जोशी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद माना जा रहा था कि उनकी गिरफ्तारी किसी भी वक्त हो सकती है। लेकिन उन्होंने पुलिस को चकमा देते हुए खुद कोतवाली पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया।
आगे की कार्रवाई
आत्मसमर्पण के बाद पुलिस ने—
-
मेडिकल औपचारिकताएँ पूरी कीं
-
बयान दर्ज किए
-
कोर्ट में पेशी की तैयारी शुरू कर दी है