“फर्जी सर्टिफिकेट से 16 साल नौकरी, महिला अधिकारी पर मुकदमा”

देहरादून। उत्तराखंड में सरकारी नौकरी में तैनात एक महिला अधिकारी की असलियत सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। अंशुल गोयल नाम की इस महिला ने 2009 में मृतक आश्रित कोटे से नौकरी पाई थी, लेकिन उसके शैक्षणिक प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं।

2009 में मिली थी नौकरी, अब बनी प्रशासनिक अधिकारी

अंशुल गोयल की नियुक्ति 2009 में मृतक आश्रित के तहत सिंचाई विभाग में कनिष्ठ सहायक के पद पर हुई थी। इसके बाद पदोन्नति पाते-पाते वह उत्तराखंड जल संस्थान प्रबंधन और नियामक आयोग, यमुना कॉलोनी में प्रशासनिक अधिकारी के पद तक पहुंच गई। वर्ष 2025 तक वह करीब 16 साल सरकारी नौकरी करती रही।

हाईस्कूल के दस्तावेज मिले फर्जी

शिकायत मिलने के बाद विभाग ने उसके शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की जांच कराई। समिति ने हाई स्कूल की मार्कशीट और प्रमाण पत्र की पुष्टि के लिए राजकीय इंटर कॉलेज पटेल नगर और उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर से जानकारी मांगी। जांच में यह खुलासा हुआ कि दिए गए रोल नंबर पर अंशुल गोयल का कोई रिकॉर्ड मौजूद ही नहीं है। यानी उसके हाई स्कूल के दस्तावेज पूरी तरह फर्जी थे।

जांच समिति ने माना कूटरचित

स्कूल और शिक्षा परिषद से मिले जवाब के आधार पर जांच समिति ने निष्कर्ष निकाला कि अंशुल गोयल के प्रमाण पत्र कूटरचित हैं। इस पर सिंचाई कार्य मंडल ने विधिक राय ली, जिसमें स्पष्ट कहा गया कि महिला अधिकारी फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर अपने पद पर बनी रहने की अधिकारी नहीं है।

पुलिस में मुकदमा दर्ज

इसके बाद केंट कोतवाली में अंशुल गोयल, निवासी नींबूवाला गढ़ीकैंट, देहरादून के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। फिलहाल मामले की गहन जांच जारी है और यह भी जांचा जा रहा है कि इतने लंबे समय तक वह कैसे विभागीय जांच से बची रही और फर्जी दस्तावेजों के बावजूद पदोन्नति पाती रही।

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