धराली आपदा: रेस्क्यू तेज, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए

धराली आपदा में जिंदगी की तलाश लगातार जारी है। शनिवार को आपदा के पांचवें दिन विभिन्न स्थानों पर फंसे 480 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया। मौसम की चुनौतियों के बावजूद रविवार को भी हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और जिला प्रशासन ड्रोन, अत्याधुनिक उपकरणों और डॉग स्क्वॉड की मदद से मलबे में दबे लोगों को खोजने में जुटा है।

धराली से लौटकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने प्रेस कांफ्रेंस की। उन्होंने आपदा पीड़ित परिवारों का हाल जाना और रेस्क्यू टीम के काम की सराहना करते हुए भारतीय सेना को धन्यवाद दिया। माहरा ने कहा कि सेना ने अपने 8 जवानों के लापता होने के बावजूद सीमित संसाधनों में राहत-बचाव मिशन को अंजाम दिया। साथ ही, उन्होंने सुझाव दिया कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए स्थायी टीम का गठन किया जाना चाहिए।

माहरा ने राज्य सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि धराली में पानी और खाने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई। लोग विस्थापन की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। उन्होंने सरकार से पूछा कि होटल और होम स्टे में ठहरे श्रद्धालुओं और मजदूरों की सूची अब तक क्यों जारी नहीं की गई, जबकि बड़ी संख्या में मजदूर लापता हैं।

राहत-बचाव अभियान के तहत रविवार दोपहर तक मातली हेलीपैड पर 53 और चिन्यालीसौड़ हवाई पट्टी पर 25 लोगों को सुरक्षित लाया गया। यहां से उन्हें उनके गंतव्य तक भेजने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में खाद्य सामग्री और जरूरी सामान की सप्लाई लगातार की जा रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तरकाशी और पौड़ी जिलों में हाल ही में अपने प्रियजनों को खोने वाले लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की।

सुबह 11 बजे तक 20 और लोगों को मतली हेलीपैड पर लाकर प्राथमिक जांच के बाद सुरक्षित गंतव्य के लिए भेजा गया। प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री घर-घर पहुंचाई जा रही है।

पिछले तीन दिनों में वायुसेना के विमान चिनूक, एमआई-17 और चीता हेलिकॉप्टर की मदद से कुल 170 लोगों को दून एयरपोर्ट लाया गया। शनिवार को 58 तीर्थयात्रियों को हर्षिल से देहरादून लाया गया। देहरादून एयरपोर्ट पर यात्रियों का स्वास्थ्य परीक्षण, उपचार, दवा वितरण और रिफ्रेशमेंट के बाद उन्हें आईएसबीटी देहरादून व ऋषिकेश भेजा जा रहा है। राहत सामग्री के रूप में 125 केवी का जेनसेट, ऑयल बैरल और अन्य जरूरी सामान भी धराली भेजा गया है।

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