रेखा आर्या के आरोपों से उत्तराखंड की सियासत में भूचाल, पति के पलटवार से बढ़ा विवाद; कांग्रेस ने धामी सरकार को घेरा

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू से जुड़ा विवाद चर्चा के केंद्र में आ गया है। मंत्री रेखा आर्या की ओर से जारी भावुक वीडियो, पति पर लगाए गए गंभीर आरोप और उनके खिलाफ दर्ज कराई गई शिकायत के बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने इस प्रकरण को महिला सुरक्षा और सरकार की जवाबदेही से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर सवाल उठाए हैं। वहीं, भाजपा ने इसे घरेलू विवाद बताते हुए कांग्रेस की राजनीति पर पलटवार किया है।

इस पूरे मामले में विवाद उस समय और गहरा गया, जब गिरधारी लाल साहू ने रेखा आर्या की ओर से जारी ऑडियो क्लिप को कथित तौर पर एआई से तैयार बताया और मंत्री पर ही गंभीर आरोप लगा दिए। दूसरी ओर, उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने मामले का संज्ञान लेते हुए देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने की बात कही है।

अब इस प्रकरण में कई सवाल उठ रहे हैं। क्या पुलिस जांच से आरोपों की सच्चाई सामने आ पाएगी? क्या यह मामला घरेलू विवाद तक सीमित रहेगा या प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बनेगा? और क्या कांग्रेस इस घटनाक्रम के जरिए भाजपा तथा मुख्यमंत्री धामी को घेरने में सफल होगी?

वीडियो जारी कर पति पर लगाए गंभीर आरोप

प्राप्त खबर के अनुसार, 15 अक्टूबर को सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने एक वीडियो जारी कर अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए। इसके साथ ही उन्होंने देहरादून के कैंट थाने में शिकायत दर्ज कराई।

रेखा आर्या की शिकायत के मुताबिक, गिरधारी लाल साहू ने वर्ष 2004 में उनसे विवाह करते समय अपनी पहली शादी की बात छिपाई थी। मंत्री ने अपने पति पर मारपीट, जान से मारने की धमकी देने और मानसिक उत्पीड़न करने जैसे आरोप भी लगाए हैं।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि सरकारी आवास पर कर्मचारियों के सामने उनके लिए जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। इसके अतिरिक्त, कुछ कंपनियों में उनके निदेशक पद से हटाने की कोशिश किए जाने का आरोप भी सामने आया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम सहित विभिन्न कानूनी प्रावधानों का उल्लेख किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता और कानूनी स्थिति का निर्धारण पुलिस जांच तथा संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

भावुक वीडियो में महिलाओं से की आवाज उठाने की अपील

वीडियो में रेखा आर्या भावुक नजर आईं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पति ने विवाह के समय खुद को अविवाहित बताया था, जबकि उनके अनुसार, वह पहले से विवाहित थे। मंत्री ने अपने साथ हुए कथित व्यवहार का जिक्र करते हुए महिलाओं से घरेलू उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने की अपील भी की।

इस घटनाक्रम ने इसलिए भी ध्यान खींचा है, क्योंकि रेखा आर्या प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और महिला एवं बाल विकास से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी भी संभालती हैं। ऐसे में उनके द्वारा लगाए गए आरोपों ने महिला सुरक्षा, घरेलू हिंसा और पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने की व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

हालांकि, किसी भी मामले में सार्वजनिक पद पर आसीन व्यक्ति की स्थिति से अलग, शिकायत की निष्पक्ष जांच और कानून के मुताबिक कार्रवाई सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

कांग्रेस ने मुख्यमंत्री धामी से पूछे सवाल

मामला सामने आने के बाद कांग्रेस ने भाजपा और प्रदेश सरकार को घेरना शुरू कर दिया। कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने सवाल उठाया कि जब सरकार में कैबिनेट मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठी महिला को कथित उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, तो आम महिलाओं की सुरक्षा और उनकी शिकायतों के निस्तारण की स्थिति क्या होगी?

दसौनी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मांग की कि रेखा आर्या की ओर से जारी ऑडियो क्लिप और लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

कांग्रेस ने इस मामले को केवल पति-पत्नी के बीच का विवाद मानकर छोड़ने के बजाय महिला सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही के व्यापक सवाल से जोड़ने की कोशिश की है। पार्टी का तर्क है कि जब किसी मंत्री की ओर से ही गंभीर शिकायत सामने आती है, तो सरकार की जिम्मेदारी है कि वह मामले को संवेदनशीलता से ले और जांच में किसी प्रकार का पक्षपात न होने दे।

अंकिता भंडारी प्रकरण का भी किया जिक्र

कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने इस विवाद को अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़ते हुए रेखा आर्या पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री ने हाल ही में अंकिता भंडारी मामले में कथित वीआईपी को लेकर ऐसा रुख अपनाया था, जिस पर सवाल उठे थे।

दसौनी ने कहा कि महिलाओं के उत्पीड़न और उनके न्याय के सवाल पर सार्वजनिक प्रतिनिधियों का रुख महत्वपूर्ण होता है। उनके बयान का आशय यह था कि महिलाओं से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और पीड़ितों के साथ खड़े होने की अपेक्षा सभी राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों से की जानी चाहिए।

यह कांग्रेस का राजनीतिक बयान है। अंकिता भंडारी मामले से जुड़े आरोपों और किसी व्यक्ति की भूमिका पर निष्कर्ष संबंधित साक्ष्यों तथा आधिकारिक जांच के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।

महिला आयोग की अध्यक्ष ने एसएसपी को दिए निर्देश

रेखा आर्या की ओर से वीडियो जारी किए जाने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर भी सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें देहरादून के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल उनसे मिलने पहुंचीं।

कंडवाल ने कहा कि घरेलू विवादों में महिलाएं अक्सर परिवार को बचाने की कोशिश करती हैं। जब परिस्थितियां उनके अनुकूल नहीं रहतीं, तब वे अपनी बात सार्वजनिक रूप से सामने रखती हैं। उन्होंने रेखा आर्या की शिकायत के संदर्भ में देहरादून के एसएसपी को संबंधित व्यक्ति के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने की बात कही।

महिला आयोग की इस प्रतिक्रिया के बाद मामले में पुलिस की भूमिका और जांच की दिशा को लेकर भी लोगों की नजरें टिकी हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के संबंध में पुलिस किन तथ्यों, दस्तावेजों, बयानों और अन्य साक्ष्यों की जांच करती है।

भाजपा ने कांग्रेस की मंशा पर उठाए सवाल

इस पूरे विवाद पर भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता हनी पाठक ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि रेखा आर्या का मामला घरेलू हिंसा से संबंधित है और इसे प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा के व्यापक मुद्दे से जोड़कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।

भाजपा प्रवक्ता के मुताबिक, रेखा आर्या ने अपने खिलाफ कथित उत्पीड़न के मामले में शिकायत दर्ज कराकर कार्रवाई का रास्ता अपनाया है। पार्टी ने इसे महिला द्वारा अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने के रूप में पेश किया।

भाजपा का कहना है कि कांग्रेस को मामले की निष्पक्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा रखना चाहिए, जबकि कांग्रेस इसे सरकार की जवाबदेही का सवाल बता रही है। इस तरह, विवाद अब केवल व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी का विषय भी बन गया है।

गिरधारी लाल साहू का पलटवार, ऑडियो को बताया एआई जनरेटेड

रेखा आर्या के आरोपों पर उनके पति गिरधारी लाल साहू ने भी प्रतिक्रिया दी है। साहू ने कथित ऑडियो क्लिप को एआई से तैयार बताया और रेखा आर्या के आरोपों को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यदि शिकायत और बयान वापस नहीं लिए गए, तो वह भी अपना पक्ष रखेंगे।

साहू ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मामले में न्याय करने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने रेखा आर्या की कथित संपत्ति को लेकर भी सवाल उठाए और जांच की मांग की।

साहू के बयान में मंत्री पर लगाए गए आरोप भी शामिल हैं। हालांकि, संपत्ति से संबंधित दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती। इसी तरह, ऑडियो क्लिप असली है या एआई की मदद से तैयार की गई है, इसका निष्कर्ष तकनीकी जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

ऐसे में फिलहाल दोनों पक्षों के आरोपों और जवाबी दावों को जांच के निष्कर्ष से अलग रखना जरूरी है।

पुराने विवादों का भी हुआ जिक्र

रिपोर्ट में गिरधारी लाल साहू से जुड़े कुछ पुराने विवादों का भी उल्लेख किया गया है। इनमें बरेली के चर्चित जैन दंपति हत्याकांड के संदर्भ में उनका नाम सामने आने, वर्ष 2017 में गुर्दा प्रत्यारोपण से संबंधित शिकायत की जांच और बिहार की लड़कियों को लेकर दिए गए एक कथित विवादित बयान का जिक्र शामिल है।

हालांकि, किसी पुराने मामले में नाम आने, शिकायत दर्ज होने या जांच होने को अपने आप में अपराध सिद्ध होना नहीं माना जा सकता। प्रत्येक मामले की स्थिति उसके आधिकारिक रिकॉर्ड, जांच के परिणाम और न्यायिक निष्कर्षों के आधार पर ही स्पष्ट होती है।

अब आगे क्या?

इस पूरे प्रकरण में अब सबसे महत्वपूर्ण भूमिका पुलिस जांच की होगी। शिकायत में लगाए गए आरोपों, कथित ऑडियो क्लिप, संबंधित व्यक्तियों के बयानों और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच से ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

राजनीतिक तौर पर कांग्रेस इस घटनाक्रम को महिला सुरक्षा और धामी सरकार की जवाबदेही से जोड़ रही है, जबकि भाजपा इसे घरेलू विवाद पर राजनीति करने का प्रयास बता रही है। गिरधारी लाल साहू के पलटवार ने विवाद को और तीखा कर दिया है।

फिलहाल, इस मामले में आरोपों की पुष्टि को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। आने वाले दिनों में पुलिस की कार्रवाई, महिला आयोग की भूमिका और दोनों पक्षों के नए बयानों से यह स्पष्ट हो सकता है कि मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह विवाद केवल दो पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहेगा, या उत्तराखंड की राजनीति में महिला सुरक्षा, जवाबदेही और राजनीतिक नैतिकता पर एक बड़ी बहस का रूप लेगा?

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