ऑनलाइन प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए करीब 25 दिन पहले घर में रखा गया था आरोपी भरत थापा, दिल्ली में भी डकैती के मामले में जेल जा चुका है
देहरादून। राजधानी देहरादून के पॉश बसंत विहार इलाके में बीजेपी पार्षद अमिता सिंह के घर हुई डकैती के मामले में पुलिस की जांच में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस के मुताबिक वारदात में घर में काम करने वाला नौकर भरत थापा मुख्य आरोपी है। आरोपी फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर है और उसकी तलाश में पुलिस की कई टीमें जुटी हुई हैं।
पुलिस जांच में आरोपी का पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार भरत थापा दिल्ली में भी डकैती की एक वारदात में जेल जा चुका है। जेल से बाहर आने के बाद वह अपने देश नेपाल चला गया था। बाद में देहरादून लौटकर उसने एक प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से घरेलू काम हासिल किया और कथित तौर पर इसी घर को निशाना बनाया।
खाने में नशीला पदार्थ मिलाकर परिवार को किया बेहोश
पुलिस के अनुसार वारदात की योजना पहले से बनाई गई थी। आरोप है कि भरत थापा ने रात में परिवार के खाने में नशीला पदार्थ मिला दिया। खाना खाने के बाद बीजेपी पार्षद अमिता सिंह, उनके पति महीपाल सिंह और बेटे की हालत बिगड़ गई और वे गहरी नींद में चले गए।
आरोप है कि परिवार के बेहोश होने के बाद भरत ने अपने साथियों को घर के अंदर बुलाया। इसके बाद बदमाशों ने लॉकर तोड़कर नकदी और लाखों रुपये के जेवरात पर हाथ साफ किया और मौके से फरार हो गए।
पीड़ित परिवार के मुताबिक बदमाश एक लॉकर में रखी करीब 3 लाख रुपये की नकदी और दूसरे लॉकर में रखे करीब 30 से 40 लाख रुपये के जेवरात लेकर फरार हुए हैं। पुलिस फिलहाल चोरी गए सामान की वास्तविक कीमत और वारदात में शामिल सभी आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।
रात करीब 1:20 बजे खुली आंख, घर में दिखे बदमाश
पीड़ित पार्षद के पति महीपाल सिंह ने पुलिस को बताया कि रात करीब 10 बजे परिवार ने खाना खाया था। इसके बाद उन्हें कब नींद आ गई, इसका पता नहीं चला। रात करीब 1:20 बजे उनकी आंख खुली तो उन्होंने बेडरूम में नौकर और दो अन्य लोगों को देखा।
महीपाल सिंह के मुताबिक उन्हें उसी समय अंदाजा हो गया था कि घर में लूटपाट हो रही है, लेकिन नशीले पदार्थ के असर के कारण वह ठीक से उठ भी नहीं पा रहे थे। किसी तरह वह घर से बाहर निकलकर पड़ोसी के घर पहुंचे और इशारों के जरिए घटना की जानकारी दी। इसके बाद पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी।
25 दिन पहले ही घर में काम पर आया था भरत
जांच में सामने आया है कि आरोपी भरत थापा को परिवार ने करीब 25 दिन पहले ही घरेलू काम के लिए रखा था। उसे दिल्ली की एक ऑनलाइन प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से काम पर रखा गया था।
पुलिस के मुताबिक पार्षद की बेटी मेघा ने दिल्ली निवासी संजीव से संपर्क किया था। इसी संपर्क के माध्यम से भरत थापा परिवार के घर में काम करने पहुंचा था। कम समय में ही उसने परिवार का विश्वास हासिल कर लिया।
पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई है कि आरोपी का स्थानीय पुलिस से सत्यापन नहीं कराया गया था। यही वजह है कि परिवार को उसके पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी नहीं थी।
दिल्ली में भी दर्ज था आपराधिक मामला
एसपी सिटी शेखर सुयाल के मुताबिक पुलिस जांच में सामने आया है कि भरत थापा दिल्ली में भी इसी तरह की डकैती के मामले में जेल जा चुका है। उसने करीब एक साल जेल में बिताया था। जेल से बाहर आने के बाद वह नेपाल चला गया था।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी देहरादून तक कैसे पहुंचा और इस वारदात में उसके साथ कौन-कौन लोग शामिल थे। पुलिस उसके पुराने संपर्कों और संभावित सहयोगियों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है।
प्लेसमेंट एजेंसी भी पुलिस के रडार पर
पुलिस ने आरोपी को घरेलू काम दिलाने वाले दिल्ली के प्लेसमेंट एजेंट को भी जांच के दायरे में लिया है। पुलिस एजेंसी संचालक से पूछताछ की तैयारी कर रही है।
जांच का एक प्रमुख बिंदु यह भी है कि आरोपी का सत्यापन किए बिना उसे घरेलू काम के लिए कैसे उपलब्ध कराया गया। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि प्लेसमेंट एजेंसी को आरोपी के आपराधिक इतिहास की जानकारी थी या नहीं।
नेपाल भागने की आशंका, बॉर्डर पर बढ़ाई गई चौकसी
वारदात के बाद आरोपी के नेपाल भागने की आशंका को देखते हुए पुलिस ने उत्तराखंड-नेपाल सीमा पर चौकसी बढ़ा दी है। सीमा क्षेत्रों में संदिग्ध लोगों और वाहनों की जांच की जा रही है।
पुलिस की टीमें आरोपी के मोबाइल नंबर, संपर्क सूत्रों और संभावित ठिकानों की जानकारी जुटा रही हैं। इसके साथ ही मोबाइल सर्विलांस की मदद से आरोपी तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।
पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती आरोपी को जल्द पकड़ने के साथ-साथ वारदात में शामिल उसके अन्य साथियों की पहचान करना है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि डकैती के पीछे कितने लोगों की भूमिका थी और आरोपी ने वारदात को अंजाम देने से पहले घर की गतिविधियों की कितनी जानकारी जुटाई थी।
इस घटना ने घरेलू सहायकों और कर्मचारियों के पुलिस सत्यापन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि घर में किसी भी कर्मचारी को रखने से पहले उसका पहचान पत्र, पता और आपराधिक सत्यापन जरूर कराया जाए।