चमोली के बेटे ने किया उत्तराखंड का नाम रौशन मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स में..

जगदीश सिह रावत (जग्गी रावत )

दिल्ली – उत्तराखंड चमोली मुश्किल और विपरीत परिस्थितियों में जिंदगी यापन करने के बीच अपने सपनों को साकार करने का जुनून हो तो परिस्थितियां भी हार मान जाती है…. उत्तराखंड के चमोली के दुर्गम क्षेत्र औली से आने वाले 23 साल के दिगम्बर सिंह रावत का मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स स्पोर्ट्स के प्रति जुनून ही है कि सीमित संसाधनों में जीवन यापन के कड़े संघर्ष से उन्होंने हाल ही में नई दिल्ली के सिरी फोर्ट में आयोजित मैट्रिक्स फाइट नाईट के नौवें संस्करण में लाइट वेट कैटगरी में दमदार जीत दर्ज कर एमएमए के राष्ट्रीय प्रोफेशनल फाइटर्स के बीच अपनी मजबूत दावेदारी दर्ज करवा ली है…

दरअसल चमोली के रहने वाले दिगम्बर सिंह रावत के पिता की मृत्यु के बाद उनकी माता ने खेती-बाड़ी कर अपने पांच बच्चों को पढ़ाया लिखाया…. घर परिवार चलाने और अपनी मां का सहारा बनने के लिए दिगम्बर सिंह ने सेना में जाने के लिए कई बार कोशिश की लेकिन किसी न किसी वजह से वो हर बार असफल हुए…. क्योंकि पहाड़ी जीवन की मुश्किल परिस्थितियों का सामान कर चुके दिगम्बर के लिए ये असफलताएं अंत नहीं थी….उन्होंने देश दुनिया के उभरते हुए और मुश्किल कॉम्बैट खेलों में से एक मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स को सीखा…..इसके बाद देश की राजधानी दिल्ली में ऑल इंडिया मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स एसोसिएशन की ओर से देश की सबसे बड़ी मैट्रिक्स फाइट नाईट के नौवें संस्करण के आयोजन में लाइट वेट कैटगरी में उन्होंने जीत दर्ज की…..अपने प्रतिद्वंदी पराक्रम डंडोना को शिकस्त दी…
दिगम्बर सिंह रावत ने अपने एमएमए खेल रिकॉर्ड में कुल 6 अव्यवसायी और 3 व्यावसायिक फाइट लड़ी और सभी में जीत दर्ज की… उनके साथ ही उनके कोच अंगद बिष्ट ने लाइट वेट कैटेगरी में अपने प्रतिद्वंदी चैतन्य गवाली को मात देकर जीत दर्ज की है….परिवार की जिम्मेदारी और पहाड़ का मुश्किल जीवन जीत हुए दिगम्बर सिंह रावत की ये जीत वाकई काबिले तारीफ है और उत्तराखंड के लिए गर्व की बात ।

 

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