विक्रम शर्मा हत्याकांड: शूटरों की तलाश में झारखंड तक दबिश, गैंगवार और इंटरस्टेट नेटवर्क की जांच तेज
देहरादून। राजधानी में दिनदहाड़े हुए कुख्यात बदमाश विक्रम शर्मा हत्याकांड ने पुलिस के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। घटना को लगभग एक सप्ताह होने के बावजूद शूटरों का कोई ठोस सुराग नहीं लग पाया है। अब जांच का दायरा उत्तराखंड से निकलकर झारखंड तक पहुंच गया है और पुलिस गैंगवार, आपसी रंजिश व अंतरराज्यीय आपराधिक नेटवर्क—तीनों एंगल पर एक साथ काम कर रही है।
झारखंड में छापेमारी, पेशेवर शूटरों का शक
जांच के दौरान मोबाइल कॉल डिटेल, लोकेशन ट्रैकिंग और संदिग्ध संपर्कों के आधार पर कुछ तार झारखंड से जुड़े मिले हैं। इसी के बाद देहरादून पुलिस की विशेष टीमें रांची और जमशेदपुर पहुंचीं, जहां स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर संदिग्धों से पूछताछ की गई।
पुलिस का मानना है कि हत्या में शामिल हमलावर पेशेवर शूटर हो सकते हैं, जिन्हें बाहर से बुलाया गया। इसके लिए झारखंड की जेलों में बंद अपराधियों के नेटवर्क की भी पड़ताल की जा रही है।

दिनदहाड़े मर्डर से दहशत
13 फरवरी की सुबह सिल्वर सिटी मॉल के जिम से बाहर निकलते समय बाइक सवार बदमाशों ने विक्रम पर नजदीक से ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी।
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कई राउंड गोलियां चलीं
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घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया गया
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डॉक्टरों ने मृत घोषित किया
वारदात के बाद शहरभर में नाकेबंदी हुई, लेकिन हमलावर फरार हो गए। घटना उस समय हुई जब सड़कों पर सामान्य दिनों की तरह भारी आवाजाही थी।
उधम सिंह नगर कनेक्शन भी खंगाला जा रहा
विक्रम शर्मा के पास मिले हथियारों और लाइसेंस का लिंक उधम सिंह नगर से जुड़ने के बाद तराई क्षेत्र में भी जांच तेज कर दी गई है।
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उसके संपर्क में रहे लोगों से पूछताछ
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स्थानीय मदद मिलने की आशंका
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हथियार लाइसेंस की फाइल की जांच
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि एक हिस्ट्रीशीटर को हथियार का लाइसेंस कैसे मिला।

भाई से लंबी पूछताछ, ठोस सबूत नहीं
देहरादून के एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने बताया कि विक्रम के भाई से भी गहन पूछताछ की गई, लेकिन उसके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं मिला। हालांकि कुछ सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं मिलने के कारण पुलिस सभी पहलुओं पर नजर बनाए हुए है।
CCTV और साइबर एनालिसिस से सुराग
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घटनास्थल और आसपास के CCTV खंगाले जा रहे
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संदिग्ध बाइक सवारों की पहचान की कोशिश
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कॉल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच
गैंगवार एंगल क्यों मजबूत
विक्रम शर्मा का आपराधिक इतिहास लंबा रहा है।
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2014 से 2017 के बीच कई मामलों में नामजद
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2021 में जेल से बाहर आने के बाद पुराने नेटवर्क को फिर सक्रिय करने की कोशिश
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हाल के महीनों में प्रतिद्वंद्वी गिरोहों से तनाव
इसी आधार पर पुलिस गैंगवार की आशंका को प्रमुखता से जांच रही है।
पुराने केस फिर खुले
जांच टीम विक्रम से जुड़े पुराने मुकदमों की फाइलें भी खंगाल रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि
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उसकी दुश्मनी किन-किन से थी
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कौन से विवाद चल रहे थे
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हत्या की जड़ किसी पुराने आपराधिक संघर्ष में तो नहीं
यह भी सामने आया है कि उसने देहरादून में जिम की सदस्यता अपने भाई के नाम से ली थी।
पुलिस का दावा – जल्द होगा खुलासा
एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल के अनुसार:
“जांच कई स्तरों पर चल रही है। उत्तराखंड के साथ अन्य राज्यों में टीमें सक्रिय हैं। कुछ अहम सुराग मिले हैं और संदिग्धों की पहचान लगभग तय हो चुकी है। जल्द पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।”