उत्तराखंड की राजनीति में ‘अंतर्कलह’ तेज, भाजपा-कांग्रेस ने एक-दूसरे पर साधा निशाना

देहरादून। चुनावी माहौल के बीच उत्तराखंड की राजनीति में सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दोनों दलों में अंदरूनी खींचतान को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि दोनों ही दलों की प्रदेश को लेकर रणनीति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं दिख रही है।

कांग्रेस का आरोप: सरकार और संगठन में तालमेल नहीं

कांग्रेस का कहना है कि भाजपा सरकार और संगठन के बीच समन्वय की कमी साफ दिखाई दे रही है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने आरोप लगाया कि इसी कारण लंबे समय से मंत्रिमंडल विस्तार का मामला अटका हुआ है।
उनका कहना है कि भाजपा के कई विधायक नाराज़ बताए जा रहे हैं और सरकार व संगठन के बीच तालमेल की कमी के कारण निर्णय लेने में देरी हो रही है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि भाजपा की अंदरूनी खींचतान का असर आगामी चुनावों में देखने को मिल सकता है।

भाजपा का पलटवार: कांग्रेस खुद संभाले अपना घर

वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस को पहले अपने संगठन की स्थिति सुधारनी चाहिए। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस अभी तक अपना संगठनात्मक ढांचा मजबूत नहीं कर पाई है और प्रदेश अध्यक्ष अपनी टीम तक घोषित नहीं कर पाए हैं।
भाजपा नेताओं के अनुसार कांग्रेस में भी कई नेता पदों की दावेदारी को लेकर आपस में बयानबाज़ी कर रहे हैं, जिससे पार्टी में अंतर्कलह साफ दिखाई दे रही है।

दोनों दलों में बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी साल में टिकट की दावेदारी और संगठन में जगह पाने की होड़ के कारण लगभग हर दल में अंदरूनी खींचतान बढ़ जाती है। ऐसे में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही एक-दूसरे की कमजोरियों को मुद्दा बनाकर राजनीतिक बढ़त लेने की कोशिश कर रहे हैं।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों दल संगठनात्मक स्तर पर किस तरह अपने मतभेदों को सुलझाते हैं और चुनावी रणनीति को मजबूत बनाते हैं।

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