उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला: दिव्यांगों की शादी पर अब ₹50 हजार की सहायता

उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला: दिव्यांगों की शादी पर अब ₹50 हजार की आर्थिक सहायता, दोगुनी हुई प्रोत्साहन राशि

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने दिव्यांगजनों के जीवन को सशक्त बनाने और उन्हें समाज में समान अधिकार दिलाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब दिव्यांग युवक या युवती से विवाह करने वाले, अथवा दिव्यांग-दिव्यांग दंपति को सरकार की ओर से ₹50,000 की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इससे पहले यह राशि ₹25,000 थी, जिसे धामी कैबिनेट की हालिया बैठक में दोगुना कर दिया गया।

योजना का उद्देश्य

यह योजना सिर्फ आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद समाज को यह संदेश देना है कि हर इंसान को अपना जीवनसाथी चुनने का अधिकार है, चाहे वह सामान्य हो या दिव्यांग। सरकार चाहती है कि दिव्यांगजन भी बिना भेदभाव और पूर्वाग्रह के जीवन का नया अध्याय शुरू कर सकें। यह प्रोत्साहन राशि न केवल आर्थिक सहारा है बल्कि सम्मान और स्वीकृति का प्रतीक भी है।

दिव्यांगों की चुनौतियों को समझना होगा

दिव्यांग व्यक्तियों को जीवन की राह में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। देहरादून निवासी गौरव कुमार, जो बचपन से चल-फिर नहीं सकते, कहते हैं—
“हमारे लिए सामान्य लोगों की तुलना में हर कदम चुनौती भरा होता है। सरकार का यह कदम सराहनीय है, लेकिन रोजगार के अवसर भी बढ़ाए जाने चाहिए। महंगाई और इलाज का खर्च हमें अक्सर दूसरों पर निर्भर बना देता है।”

गौरव की यह बात बताती है कि दिव्यांगों के लिए वित्तीय सहायता के साथ रोजगार और स्वावलंबन के अवसर भी उतने ही जरूरी हैं।

योजना की शर्तें

जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपक घिल्डियाल के अनुसार इस योजना का लाभ लेने के लिए कुछ शर्तें निर्धारित की गई हैं—

  • वर या वधू में से किसी एक का कम से कम 40% दिव्यांग होना अनिवार्य है।

  • यह उनकी पहली शादी होनी चाहिए।

  • दंपति की मासिक आय ₹4,000 से अधिक नहीं होनी चाहिए।

  • आवेदन के लिए आधार कार्ड, स्थायी निवास प्रमाणपत्र, दिव्यांग प्रमाणपत्र और यूडीआईडी कार्ड आवश्यक होंगे।

  • इच्छुक आवेदक अधिक जानकारी के लिए समाज कल्याण विभाग की वेबसाइट ssp.uk.gov.in पर जा सकते हैं।

दिव्यांगजन को सशक्त बनाने की दिशा में कदम

राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों मिलकर दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए लगातार योजनाएं चला रही हैं। यह प्रोत्साहन योजना न केवल विवाह संस्था को सम्मानजनक समर्थन देती है बल्कि समाज में समानता और संवेदनशीलता का संदेश भी फैलाती है।

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