उत्तराखंड कैबिनेट बैठक संपन्न: चार अहम प्रस्तावों पर लगी मुहर, मंदिरों में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या पर भी हुई चर्चा

देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आज मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित की गई। बैठक के बाद सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने पत्रकारों को बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी दी। इस बैठक में कुल चार महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर कैबिनेट ने अपनी मुहर लगाई। साथ ही, प्रदेश के धार्मिक स्थलों में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा की गई।

प्रदेश के मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या में बड़ा इजाफा

पर्यटन विभाग द्वारा कैबिनेट को जानकारी दी गई कि उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में श्रद्धालुओं की संख्या में बीते साल की तुलना में इस वर्ष उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

  • कार्तिक स्वामी मंदिर में इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में चार गुना इजाफा दर्ज किया गया है।

  • जागेश्वर धाम में पिछले वर्ष लगभग 4 लाख श्रद्धालु पहुंचे थे, जबकि इस वर्ष अब तक 6 लाख से अधिक लोग दर्शन कर चुके हैं।

  • इसी प्रकार, उत्तरकाशी के साल्ड गांव स्थित जगन्नाथ मंदिर में भी श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

सरकार का लक्ष्य है कि चारधाम के अतिरिक्त अन्य पौराणिक मंदिरों में भी अधिक से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचें, जिससे राज्य का धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों सशक्त हों।


कैबिनेट बैठक में पारित चार प्रमुख प्रस्ताव

  1. उप-निबंधक (ऑडिट) पद का सृजन:
    कैबिनेट ने सहकारी समितियों (Cooperative Societies) के ऑडिट के लिए उप-निबंधक (ऑडिट) के एक नए पद के सृजन को मंजूरी दे दी है। यह पद अगले पांच वर्षों के लिए सृजित किया गया है।

  2. बदरीनाथ में आर्टवर्क कार्य को मंजूरी:
    बदरीनाथ धाम में स्थित आईएसबीटी (ISBT) की दीवार पर धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाते हुए आर्टवर्क (wall painting/art installation) किए जाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। इससे क्षेत्र का सौंदर्यीकरण और सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी।

  3. ‘गंगा गाय योजना’ का एकीकरण:
    पशुपालन विभाग द्वारा अनुसूचित जाति वर्ग को 90% सब्सिडी पर गाय दी जाती थी, जबकि सामान्य वर्ग को डेयरी विभाग की ‘गंगा गाय योजना’ के तहत लाभ मिलता था। अब इन दोनों योजनाओं को एकीकृत करने का निर्णय लिया गया है, ताकि व्यवस्थाएं अधिक पारदर्शी और प्रभावी बन सकें।

  4. पशुधन प्रसार अधिकारियों की ट्रेनिंग अवधि में कटौती:
    पशुपालन विभाग में 429 पद लंबे समय से खाली हैं। अधिकारियों की भर्ती के बाद वर्तमान में 2 वर्षों की ट्रेनिंग दी जाती है, जिससे जॉइनिंग में 4 साल तक का समय लग जाता है। अब कैबिनेट ने निर्णय लिया है कि ट्रेनिंग अवधि को घटाकर 1 वर्ष किया जाएगा, जिससे रिक्त पदों को शीघ्र भरा जा सके और सेवा में तेजी आए।

उत्तराखंड सरकार का यह प्रयास धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने और प्रशासनिक ढांचे को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इन प्रस्तावों के लागू होने से प्रदेश में विकास की गति को और बल मिलेगा।

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