देहरादून में एलिवेटेड रोड के खिलाफ उबाल: ‘विकास नहीं, विनाश’ बताकर लोगों ने छेड़ा सप्ताहव्यापी जनआंदोलन

देहरादून: राजधानी देहरादून में प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर विरोध तेज हो गया है। दून समग्र विकास अभियान के बैनर तले शुरू हुए सप्ताहव्यापी जनअभियान ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में सरकार के खिलाफ नाराजगी की खुली आवाज़ बुलंद कर दी है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार बिना समुचित अध्ययन, पारदर्शिता और जनसंवाद के इस परियोजना को जबरन लागू करना चाहती है।

“यातायात समाधान नहीं, नई समस्या”

आंदोलनकारियों का कहना है कि एलिवेटेड रोड से ट्रैफिक जाम कम होने के बजाय मसूरी मार्ग पर दबाव और बढ़ेगा। उनका तर्क है कि शहर के भीतर वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन सार्वजनिक परिवहन मजबूत करने के बजाय महंगी सड़क परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।

 आपदा के बाद बढ़ी चिंता

प्रदर्शन में शामिल लोगों ने 15 सितंबर की भीषण आपदा का हवाला देते हुए कहा कि दो नदियों के बीच खंभे खड़े करने की योजना बेहद खतरनाक है। उनका आरोप है कि सरकार संभावित बाढ़ जोखिम, नदी तंत्र और पर्यावरणीय प्रभावों को नजरअंदाज कर रही है।
“यह विकास नहीं, हजारों लोगों की जान के साथ खिलवाड़ है,” आंदोलन में शामिल नागरिकों ने कहा।

 पारदर्शिता पर सवाल

आंदोलनकारियों ने दावा किया कि अब तक:

  • विस्तृत पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) सार्वजनिक नहीं

  • प्रभावित आबादी के लिए पुनर्वास योजना स्पष्ट नहीं

  • वैकल्पिक यातायात मॉडल पर जनसुनवाई नहीं

उनका कहना है कि अधूरी रिपोर्टों के आधार पर परियोजना को “विकास” के नाम पर आगे बढ़ाया जा रहा है।

गूंजे नारे, कई इलाकों में प्रदर्शन

आज ब्रह्मपुरी, कांठ बंगला भाग-1 व 2, गब्बर बस्ती, हैप्पी एनक्लेव, अधोईवाला, राजीव नगर कंडोली, जाखन सहित कई इलाकों में सभाएं और प्रदर्शन हुए। लोगों ने नारे लगाए—
“नहीं चाहिए एलिवेटेड रोड की मार, हमें चाहिए घर, बस और रोजगार।”

क्या हैं प्रमुख मांगें?

आंदोलन के तहत नागरिकों ने सरकार से मांग की है:

  • एलिवेटेड रोड परियोजना रद्द की जाए

  • शहर में बसों की संख्या बढ़ाकर सार्वजनिक परिवहन सशक्त किया जाए

  • यातायात प्रबंधन में सुधार के स्थायी उपाय

  • आवास निर्माण से जुड़ी रोजगार गारंटी योजना लागू हो

 आगे भी जारी रहेगा अभियान

दून समग्र विकास अभियान से जुड़े लोगों ने साफ किया है कि आने वाले दिनों में अन्य क्षेत्रों में भी विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे। उनका कहना है कि जब तक सरकार परियोजना पर पुनर्विचार कर सार्वजनिक संवाद शुरू नहीं करती, आंदोलन जारी रहेगा।

देहरादून में एलिवेटेड रोड को लेकर उठी यह आवाज़ अब एक व्यापक जनचर्चा का रूप लेती दिख रही है, जहां विकास बनाम पर्यावरण और जनसुरक्षा का सवाल केंद्र में आ गया है।

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