UKSSSC पेपर लीक विवाद: छात्रों के भेष में मिले ‘बहरूपिये’, सचिव से मुलाकात में BDO, प्रधान और दुकानदार का खुलासा

देहरादून। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है। राजधानी से लेकर जिलों तक छात्र सड़कों पर उतरकर पेपर रद्द करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। लेकिन इस आंदोलन के बीच कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं, जिसने सरकार और छात्रों दोनों को हैरान कर दिया है।

सचिव से मिले ‘छात्र’, निकले BDO, प्रधान और दुकानदार

हाल ही में सचिवालय में सचिव शैलेश बगौली से मिलने पहुंचे एक तथाकथित छात्र संगठन ने खुद को आंदोलनरत छात्रों का प्रतिनिधि बताया।
लेकिन मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पता चला कि छात्रों के नाम पर सचिव से मिलने वालों में असल में शामिल थे –

  • हरिद्वार का ग्राम विकास अधिकारी (BDO), जिस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और जो पहले जेल भी जा चुका है।

  • सेलाकुई का कपड़े का दुकानदार

  • हरिद्वार जिले का एक ग्राम प्रधान

यानी आंदोलनरत छात्रों के बीच ऐसे लोग घुसपैठ कर गए जो खुद छात्र नहीं थे।

नेपाली फार्म पर भी पहुंचे ‘बसों भरकर छात्र’

इसी तरह, देहरादून और हरिद्वार के बीच नेपाली फार्म पर चल रहे छात्रों के प्रदर्शन के दौरान अचानक कई बसों में भरकर सैकड़ों तथाकथित छात्र पहुंचे।
पहले तो उन्होंने आयोग से परीक्षा का रिजल्ट जल्द जारी करने की मांग की, लेकिन थोड़ी ही देर बाद अपने बयान से पलट गए। उनका कहना था कि उन्हें बिना बताए यहां लाया गया और वास्तव में वे सिर्फ हरिद्वार के कॉलेजों के छात्र हैं।

आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश?

इन घटनाओं ने छात्रों और आम जनता के बीच कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं –

  • क्या सचिव से मिलने वाले ये ‘बहरूपिये’ जानबूझकर आंदोलन को कमजोर करने के लिए भेजे गए?

  • क्या बसों में लाए गए छात्रों को असली आंदोलन से ध्यान भटकाने के लिए इस्तेमाल किया गया?

  • क्या इस पूरे घटनाक्रम का पेपर लीक गैंग से कोई सीधा संबंध है?

छात्रों का आरोप और सरकार की मुश्किलें

आंदोलनरत छात्रों का आरोप है कि यह सब सरकार की “नाकाम और नापाक कोशिश” है ताकि असली आंदोलन कमजोर किया जा सके।
वहीं सरकार के लिए यह मामला और मुश्किल बन गया है, क्योंकि पेपर लीक पर पहले से ही भारी दबाव है और अब आंदोलन में घुसपैठ के आरोप उसकी साख पर और सवाल खड़े कर रहे हैं।

UKSSSC पेपर लीक घोटाला पहले से ही युवाओं के गुस्से की आग में घी डाल चुका है। अब आंदोलन में घुसपैठ और बहुरूपियों की मौजूदगी ने स्थिति को और पेचीदा बना दिया है।
आंदोलन को दबाने की कोशिश या किसी गैंग की चाल – इसकी सच्चाई सामने आना बेहद जरूरी है।

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