उत्तराखंड में तोताघाटी: सैकड़ों मीटर गहरी दरारें, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी—संपूर्ण पहाड़ ढह सकता है

जग्गी रावत 

उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले की तोताघाटी, जो अपनी संकरी सड़कों और तीखे मोड़ों के लिए जानी जाती है, अब भूगर्भीय खतरों का सामना कर रही है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर यहां की दरारें और चौड़ी होती रहीं, तो एक पूरा पहाड़ ढह सकता है, जिससे बद्रीनाथ, केदारनाथ और ऋषिकेश से गढ़वाल क्षेत्र के बड़े हिस्से तक पहुंच बंद हो सकती है।

तोताघाटी में बढ़ती दरारों का खतरा

तोताघाटी में पिछले कुछ महीनों से सैकड़ों मीटर गहरी दरारें नजर आ रही हैं। वरिष्ठ भूविज्ञानी प्रो. महेंद्र प्रताप सिंह बिष्ट ने बताया कि ये दरारें चूना पत्थर की चट्टानों में स्वाभाविक रूप से विकसित हो रही हैं, जो समय के साथ बढ़ रही हैं। इन दरारों का फैलाव इस हद तक हो सकता है कि यह पूरे पहाड़ की संरचना को प्रभावित कर सकती है। उनका कहना है कि यदि इन दरारों का विस्तार जारी रहा, तो पूरा पहाड़ ढह सकता है, जिससे एक भूस्खलन जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

प्रमुख समस्याएँ और संभावित विनाश

प्रो. बिष्ट ने बताया कि तोताघाटी में चूना पत्थर की चट्टानें हैं, जिनमें गहरी दरारें या ‘क्लिंट’ उत्पन्न हो रही हैं। इन दरारों का आकार बढ़ने से चट्टानों के गिरने का खतरा बढ़ सकता है। वे यह भी कहते हैं कि दरारों की चौड़ाई लगभग ढाई से तीन फीट तक पहुंच चुकी है, और इनकी गहराई को परखने के लिए जब टीम ने पत्थर डाला तो वह लगभग 80 मीटर तक नीचे चला गया। इससे यह संकेत मिलता है कि यह खतरनाक दरारें केवल सतह तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि पहाड़ की पूरी संरचना को प्रभावित कर सकती हैं।

सिरोबगड़: बार-बार भूस्खलन का कारण

प्रो. बिष्ट ने सिरोबगड़ इलाके पर भी चिंता जताई है, जहां बार-बार भूस्खलन होते हैं और सड़कें ढह जाती हैं। सिरोबगड़ नाम गढ़वाली भाषा के दो शब्दों ‘सेरा’ और ‘बगड़’ से बना है, जिसमें ‘सेरा’ का अर्थ होता है धान की खेती और ‘बगड़’ का अर्थ बहना। इसका मतलब यह है कि इस इलाके में तीव्र बारिश के दौरान सड़कों पर भूस्खलन होना स्वाभाविक है, और यही स्थिति सिरोबगड़ क्षेत्र में बार-बार देखी जाती है।

भविष्य में संभावित परिणाम

तोताघाटी की बढ़ती दरारों से केवल सड़क यातायात पर ही खतरा नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के स्थानीय अर्थव्यवस्था और सैन्य परिवहन पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकता है। अगर यह दरारें और फैलती हैं तो गढ़वाल क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों और पर्यटकों के लिए एक बड़ी आपदा का कारण बन सकती है।

प्रो. बिष्ट और उनकी टीम नियमित रूप से इन दरारों की निगरानी कर रहे हैं और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण समेत विभिन्न विभागों को इन खतरे से अवगत करवा रहे हैं।

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