चारधाम यात्रा पर अव्यवस्था का खतरा: सरकार की तैयारियों पर कांग्रेस का सवाल, IIM रिपोर्ट से मंत्री अंजान
सूर्यकांत धस्माना ने सरकार पर साधा निशाना, बोले – यात्रा से पहले ठोस योजना का अभाव, सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ रही मौतें चिंता का विषय
देहरादून। आगामी चारधाम यात्रा को लेकर उत्तराखंड की धामी सरकार एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (संगठन एवं प्रशासन) सूर्यकांत धस्माना ने एक पत्रकार वार्ता में सरकार पर भ्रम की स्थिति पैदा करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यात्रा शुरू होने में केवल दस दिन शेष हैं, लेकिन सरकार की तैयारियों में भारी असंगति और लापरवाही साफ नजर आ रही है।

धस्माना ने कहा कि सरकार एक तरफ यात्रियों के ऑनलाइन और ऑफलाइन पंजीकरण की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ यह कह रही है कि पंजीकृत और गैर-पंजीकृत सभी यात्रियों को यात्रा की अनुमति दी जाएगी। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि यात्रा मार्गों पर भारी भीड़ और अव्यवस्था की स्थिति बन सकती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पिछले वर्षों की तरह इस बार भी सरकार के पास केवल दावों का पुलिंदा है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस योजना दिखाई नहीं दे रही।
धस्माना ने सबसे गंभीर सवाल यह उठाया कि राज्य के पर्यटन और तीर्थाटन मंत्री को अभी तक IIM रोहतक की उस रिपोर्ट की जानकारी नहीं है, जिसमें यात्रा मार्गों और शहरों की भार वहन क्षमता का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। जबकि राज्य की मुख्य सचिव इसी रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि मंत्री द्वारा “असीमित यात्रियों” को आमंत्रण देना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है और इससे यात्रा के दौरान भीड़ प्रबंधन पूरी तरह फेल हो सकता है, जैसा कि पिछले वर्ष देखने को मिला था, जब भीड़ ने बैरिकेडिंग तक तोड़ डाली थी।
कांग्रेस नेता ने कहा कि चारधाम यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की जीवनरेखा भी है। इससे लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी है, इसलिए इसकी सफलता और सुरक्षित संचालन सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। यात्रियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, आवास, भोजन और विशेषकर ‘दर्शन’ की व्यवस्था सुनिश्चित करना सरकार का कर्तव्य है।
धस्माना ने कहा कि पिछले आठ वर्षों का अनुभव यह दर्शाता है कि सरकार हर बार केवल बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन व्यवस्था के मामले में नाकाम रहती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 30 जुलाई को केदारनाथ घाटी में आई आपदा ने यात्रा को बुरी तरह प्रभावित किया था और यात्रा समाप्त होने तक सामान्य स्थिति बहाल नहीं हो सकी थी। इसके अलावा, यमुनोत्री और बद्रीनाथ रूट पर भी यात्रा अवरुद्ध रही थी।
सड़क सुरक्षा के मुद्दे पर धस्माना ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में हर साल औसतन एक हज़ार लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हुई है और लगभग डेढ़ हज़ार लोग घायल हुए हैं। इस वर्ष की पहली तिमाही में ही सड़क दुर्घटनाओं में 275 लोगों की जान जा चुकी है, जो चिंताजनक आंकड़ा है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि यात्रा मार्गों की भार वहन क्षमता का कड़ाई से पालन किया जाए और सभी यात्रियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, आवास, भोजन और दर्शन की उचित व्यवस्था की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि केवल दिखावे की बजाय सरकार को जिम्मेदारी के साथ यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से संचालित करना चाहिए।
प्रेस वार्ता के दौरान प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह, प्रदेश अध्यक्ष के मीडिया सलाहकार सरदार अमरजीत सिंह और श्रम प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश कौशल भी मौजूद रहे।