गुलदार और भालू के बढ़ते हमलों ने बढ़ाई चिंता, गढ़वाल के चार जिलों में अब मुख्यालय से भेजे गए अफसर करेंगे मॉनिटरिंग

उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। खासकर पहाड़ी जिलों में गुलदारों और भालुओं के हमलों ने ग्रामीणों की नींद उड़ाकर रख दी है। कभी रात में तो कभी दिन के उजाले में जंगली जानवरों का घरों के आंगन तक पहुंच जाना न केवल ग्रामीणों में दहशत फैला रहा है, बल्कि वन विभाग के सामने बड़ी चुनौती बन गया है। लगातार बढ़ रहे इन खतरों को ध्यान में रखते हुए अब वन मुख्यालय ने विशेष कदम उठाए हैं।

पहली बार ऐसा हुआ है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए मुख्यालय स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों को सीधे जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। विभाग ने गढ़वाल के चार जिलों—पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी—के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए हैं, जो स्थानीय स्तर पर संघर्ष रोकथाम और राहत से जुड़े कार्यों की निगरानी करेंगे।

इन नियुक्तियों के तहत अपर प्रमुख वन संरक्षक नरेश कुमार को पौड़ी, मुख्य वन संरक्षक राहुल को रुद्रप्रयाग, मुख्य वन संरक्षक पीके पात्रो को चमोली और सुशांत कुमार पटनायक को उत्तरकाशी की जिम्मेदारी दी गई है। ये अधिकारी अपने-अपने जिलों में मानव-वन्यजीव संघर्ष से जुड़ी घटनाओं की समीक्षा करेंगे, डीएफओ के साथ समन्वय बनाते हुए राहत एवं सुरक्षा उपायों को मजबूत करेंगे और उच्च स्तर से जारी निर्देशों पर नजर रखेंगे।

वन विभाग ने नोडल अधिकारियों को सात प्रमुख जिम्मेदारियां सौंपते हुए स्पष्ट किया है कि वे संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों की रिस्क मैपिंग करेंगे, हॉटस्पॉट चिन्हित करेंगे और विभाग को सुधारात्मक सुझाव भेजेंगे। इसके अलावा पीड़ित परिवारों को तत्काल मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया तेज करना, संघर्ष रोकने वाले उपकरणों की उपलब्धता और स्थिति की समीक्षा करना भी इन्हीं अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी।

जनसुनवाई के दिनों में संबंधित डीएफओ की उपस्थिति सुनिश्चित करवाना तथा हर सप्ताह विभाग को संघर्ष से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट भेजना भी इनके कार्यों में शामिल है। वन विभाग का मानना है कि इन नोडल अधिकारियों के तैनात होने से ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से कार्यवाही हो सकेगी और आपात स्थिति में लोगों को तुरंत सहायता मिल पाएगी।

प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) रंजन कुमार मिश्र का कहना है कि जंगली जानवरों द्वारा मनुष्यों पर हमलों के मामले जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए अब अधिक सतर्क और सुनियोजित व्यवस्था की आवश्यकता है। मुख्यालय से वरिष्ठ अफसरों की प्रत्यक्ष निगरानी से स्थिति को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बदलती वन्यजीव गतिविधियों ने जहां लोगों में डर बढ़ा दिया है, वहीं विभाग की यह नई पहल मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।

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