भस्म के रंग, काशी के संग: भक्ति और आस्था से भस्ममय रहा दरबार

2 मार्च 2026 को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी पावन भस्म होली का उत्सव श्रद्धा, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ मनाया गया। प्रातःकालीन आरती के उपरांत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में एकत्रित हुए और काशी की इस अनूठी परंपरा में सहभागी बनकर स्वयं को शिवभक्ति के रंग में रँग लिया। पूरा वातावरण “हर-हर महादेव” के जयघोष से गुंजायमान रहा।

महंतों के सान्निध्य में दिव्य आयोजन

महंत जयेंद्र पुरी के मार्गदर्शन एवं महंत अजय पुरी के आह्वान पर आयोजित इस दिव्य उत्सव में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम में विधायक सुरेश चौहान, पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष सुधा गुप्ता सहित अनेक जनप्रतिनिधि, संतजन, व्यापारी वर्ग और स्थानीय गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

भस्म का आध्यात्मिक महात्म्य

महंत अजय पुरी जी ने भस्म के महत्व का वर्णन करते हुए बताया कि यह भस्म भगवान के चरणों में अर्पित आहुतियों से प्राप्त होती है। वर्ष भर श्रद्धालु अपने कष्ट, पीड़ा और मनोकामनाओं को आहुति के रूप में समर्पित करते हैं और उसी पवित्र अर्पण से यह दिव्य भस्म तैयार की जाती है।

उन्होंने कहा कि यह आयोजन श्रद्धालुओं के जीवन में भगवान शिव के अमृततुल्य आशीर्वाद की प्राप्ति और सकारात्मक ऊर्जा के संचार की भावना से किया जाता है।

गरिमामय और शांतिपूर्ण समापन

भक्ति, अनुशासन और उत्साह से परिपूर्ण यह आयोजन अत्यंत भव्य और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं की सहभागिता ने इसे अविस्मरणीय बना दिया।

अंत में महंत जी ने श्री काशी विश्वनाथ सेवा मंडल, मातृ शक्ति, गुरुकुलम परिवार एवं सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

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