उत्तराखंड की नेलांग घाटी में 4300 मीटर की ऊंचाई पर मिला बर्फ से बना शिवलिंग, SDRF ने खोजी अनदेखी चोटी

उत्तरकाशी, 8 जुलाई 2025 — उत्तराखंड की बर्फीली वादियों में आस्था और रोमांच का अद्भुत संगम सामने आया है। राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) की पर्वतारोहण टीम ने चीन सीमा से सटे नेलांग घाटी के नीलापानी क्षेत्र में एक अनाम और अब तक अप्रवेशित चोटी (6,054 मीटर ऊँची) पर चढ़ाई के दौरान 4300 मीटर की ऊंचाई पर बर्फ से बनी शिवलिंग की आकृति की खोज की है। यह आकृति जम्मू-कश्मीर स्थित अमरनाथ शिवलिंग के समान दिखाई देती है, और इसके पास नंदी के आकार की एक और बर्फीली संरचना भी देखी गई है।

नई ट्रैकिंग संभावनाओं की खोज में मिली आध्यात्मिक धरोहर

यह खोज SDRF द्वारा राज्य की 25वीं वर्षगांठ पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शुरू किए गए नई ट्रैकिंग और साहसिक पर्यटन स्थलों के विकास अभियान के तहत हुई। अप्रैल 2025 में शुरू हुए इस अभियान में 20 सदस्यीय SDRF टीम को उत्तरकाशी की दुर्गम चोटियों पर भेजा गया था, ताकि अनदेखे ट्रैकिंग रूट और पर्यटन स्थलों की पहचान की जा सके।

टीम ने नीलापानी क्षेत्र की एक ऐसी चोटी पर विजय प्राप्त की, जहाँ पहले कोई भी पर्वतारोहण दल नहीं पहुंचा था। यहीं, 4300 मीटर की ऊंचाई पर बर्फ से बनी प्राकृतिक शिवलिंग जैसी आकृति मिली, जिसने पूरे अभियान को धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व प्रदान कर दिया।

अमरनाथ जैसा धार्मिक केंद्र बन सकता है नेलांग

बर्फ से बनी इस शिवलिंग की संरचना और ऊंचाई को देखकर यह क्षेत्र अब उत्तराखंड के संभावित धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में देखा जा रहा है। अमरनाथ की शिवलिंग जहां 3888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, वहीं नेलांग का यह शिवलिंग उससे भी ऊंचाई पर पाया गया है। यदि सरकार इस खोज को धार्मिक और पर्यटन दृष्टि से महत्व देती है, तो यहां भी अमरनाथ जैसी आध्यात्मिक यात्रा शुरू की जा सकती है।

शिवलिंग तक कैसे पहुँचा जा सकता है?

  • स्थान: उत्तरकाशी जिले के गंगोत्री धाम से लगभग 10 किलोमीटर पहले स्थित लंकापुल से नेलांग वैली तक सड़क मार्ग मौजूद है।

  • अनुमति: यह क्षेत्र संवेदनशील होने के कारण स्थानीय प्रशासन से विशेष अनुमति लेना अनिवार्य है।

  • रूट विवरण: नेलांग से नीलापानी तक वाहन से पहुँचने के बाद एक कठिन ट्रैकिंग रूट शुरू होता है।
    लगभग 4.5 किलोमीटर लंबा बर्फीला ट्रैक पार कर शिवलिंग जैसी आकृति वाले स्थान तक पहुँचा जा सकता है।

  • रास्ते में पार्वती कुंड भी आता है, जो पहले से ही एक दर्शनीय स्थल है और हर वर्ष पर्यटकों को आकर्षित करता है।

SDRF ने सौंपी रिपोर्ट, सरकार कर सकती है घोषणा

SDRF टीम द्वारा इस महत्वपूर्ण खोज की रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी गई है। अगर इस खोज को मान्यता दी जाती है और बुनियादी सुविधाएँ विकसित की जाती हैं, तो यह स्थान जल्द ही धार्मिक पर्यटन और साहसिक ट्रैकिंग दोनों का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

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