“ऋण प्रक्रिया में सरलीकरण और ऋण जमा अनुपात बढ़ाने पर विशेष जोर दें: सीएम धामी” राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में जनहित को प्राथमिकता देने के निर्देश, अक्टूबर में होंगे जिला स्तरीय मेगा कैंप
राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में जनहित को प्राथमिकता देने के निर्देश, अक्टूबर में होंगे जिला स्तरीय मेगा कैंप
देहरादून :मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सचिवालय में आयोजित राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) की विशेष बैठक में अधिकारियों और बैंक प्रतिनिधियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ऋण प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए और बीमा क्लेम की प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी व त्वरित हों, ताकि केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभ जनता तक आसानी से पहुंचे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जन समस्याओं का समाधान करना राज्य सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। इसके लिए जनपद स्तर पर बड़े पैमाने पर शिविरों का आयोजन अक्टूबर में किया जाएगा, जिसमें सभी विभागों और बैंकों की संयुक्त भागीदारी से “वन स्टॉप सॉल्यूशन” मॉडल के तहत नागरिकों को योजनाओं का लाभ दिया जाएगा।
ऋण जमा अनुपात बढ़ाने पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य का ऋण जमा अनुपात 54% से बढ़कर 54.26% हुआ है, जिसे अगले चरण में 60% तक पहुंचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने टिहरी, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा, पौड़ी और बागेश्वर जैसे पर्वतीय जनपदों में ऋण जमा अनुपात को बेहतर करने के लिए विशेष रणनीति अपनाने के निर्देश दिए।
बीमा और क्रेडिट योजनाओं में उत्तराखंड का बेहतर प्रदर्शन
बैठक के दौरान दी गई जानकारी के अनुसार:
-
प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के अंतर्गत उत्तराखंड में प्रति लाख पर 48,000 लोग बीमा कवरेज पा रहे हैं, जो राष्ट्रीय औसत 40,000 से काफी अधिक है।
-
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना में राज्य में प्रति लाभार्थी औसतन ₹93,900 का ऋण वितरित हुआ है, जबकि राष्ट्रीय औसत ₹62,686 है।
-
प्रधानमंत्री जन-धन योजना के अंतर्गत अब तक राज्य में 39 लाख बैंक खाते खोले जा चुके हैं, जो पर्वतीय राज्यों में सबसे अधिक हैं।
कृषि और स्वरोजगार योजनाओं में उल्लेखनीय प्रगति
-
राज्य में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना और मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत गत तीन वर्षों में निरंतर प्रगति हुई है।
-
केसीसी योजना (किसान क्रेडिट कार्ड) के अंतर्गत अब तक 6 लाख 10 हजार 636 किसानों को लाभ मिला है, जिनमें 67% छोटे और सीमांत किसान हैं।
-
राज्य के 70.23% स्वयं सहायता समूहों (SHG) का क्रेडिट लिंकेज हुआ है, और विगत तीन वर्षों में SHG की संख्या में 21% की वृद्धि दर्ज की गई है।