उत्तराखंड में नई आवास नीति की तैयारी तेज, शहरों और धामों की ‘धारण क्षमता’ तय करने की कवायद शुरू

देहरादून। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और पर्वतीय क्षेत्रों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए उत्तराखंड सरकार जल्द ही नई आवास नीति लाने जा रही है। साथ ही राज्य के प्रमुख शहरों और धार्मिक स्थलों की कैरिंग कैपेसिटी (धारण क्षमता) तय करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने समीक्षा बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्देश दिए।

2017 की नीति की अवधि समाप्त, अब नई रूपरेखा

सचिव आवास ने स्पष्ट कहा कि वर्ष 2017 में जारी आवास नीति की वैधता अवधि समाप्त हो चुकी है। ऐसे में बदलते हालात के अनुसार नई नीति तैयार करना जरूरी है।
नई नीति में इन बिंदुओं को प्राथमिकता दी जाएगी:

  • किफायती आवास (Affordable Housing)

  • पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक चुनौतियां

  • सतत और संतुलित विकास

  • शहरी क्षेत्रों का नियोजित विस्तार

PMAY (शहरी) की प्रगति पर सख्ती

बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 और 2.0 की प्रगति की समीक्षा की गई।
निर्देश दिए गए कि:

  • निर्माण, स्वीकृति और आवंटन से जुड़े सभी कार्य समयसीमा के भीतर पूरे हों

  • शहरी गरीबों को समय पर आवास उपलब्ध कराया जाए

  • सितंबर 2026 तक योजना से जुड़े लंबित कार्य पूरे किए जाएं

  • 15 दिनों के भीतर आवंटन व अन्य प्रक्रियाएं पूरी करने हेतु औपचारिक पत्र जारी किए जाएं

MDDA और HRDA परियोजनाओं की समीक्षा

सचिव आवास ने उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण, जिलास्तरीय विकास प्राधिकरणों और विशेष रूप से MDDA व HRDA की परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी ली।
HRDA को लंबित विकास कार्य प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए गए।

शहरों और धामों की ‘धारण क्षमता’ होगी तय

बैठक में कैरिंग कैपेसिटी असेसमेंट स्टडी के ड्राफ्ट पर भी चर्चा हुई।
यह अध्ययन खास तौर पर इन क्षेत्रों के लिए अहम माना गया:

  • प्रमुख नगर

  • तीर्थस्थल

  • चारधाम क्षेत्र

  • पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील पर्वतीय इलाके

सचिव आवास ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में यह अध्ययन प्राथमिकता पर किया जाए, ताकि विकास कार्य पर्यावरणीय संतुलन के साथ आगे बढ़ सकें और भीड़, यातायात, जल संसाधन और कचरा प्रबंधन जैसी समस्याओं का दीर्घकालिक समाधान मिल सके।

संतुलित विकास पर जोर

सरकार का उद्देश्य है कि आवास विकास और शहरी विस्तार के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो। धारण क्षमता तय होने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि किसी शहर या धाम में कितनी आबादी और निर्माण गतिविधि सुरक्षित रूप से संभव है। नई आवास नीति और कैरिंग कैपेसिटी अध्ययन राज्य के शहरी और धार्मिक स्थलों के भविष्य की दिशा तय करेंगे। यह कदम उत्तराखंड में नियोजित, सुरक्षित और पर्यावरण-संतुलित विकास की दिशा में अहम माना जा रहा है।

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