‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ से खुलेगा विकास का रास्ता: महेंद्र भट्ट बोले – बार-बार चुनाव से देश को भारी नुकसान

देहरादून – भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने “एक राष्ट्र, एक चुनाव” (One Nation, One Election) की अवधारणा को भारतीय लोकतंत्र के हित में एक ऐतिहासिक कदम बताया है। उन्होंने इसे विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक निर्णायक पहल कहा और विश्वास जताया कि यह प्रणाली देश में बार-बार लगने वाले विकासात्मक ब्रेक को समाप्त कर सकती है।

भट्ट ने कहा कि यह विचार कोई नया नहीं है, बल्कि आज़ादी के बाद भारत में 1952 से 1967 तक इसी प्रणाली के तहत चुनाव संपन्न होते थे। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत अपनी पुरानी लोकतांत्रिक परंपराओं की पुनर्स्थापना करे और विकास की राह में आने वाली बाधाओं को दूर किया जाए।


समय और संसाधनों की बचत का बड़ा अवसर

महेंद्र भट्ट ने आंकड़ों के माध्यम से बताया कि 2024 के लोकसभा चुनावों में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि अगर केंद्र और राज्य चुनाव एक साथ होते तो 12 हजार करोड़ रुपये की बचत संभव थी। उन्होंने यह भी कहा कि इससे GDP में लगभग 1.5% की वृद्धि हो सकती है, जो करीब 4.5 लाख करोड़ रुपये के बराबर होगी।

उन्होंने कहा कि बार-बार चुनावों के कारण विकास योजनाओं में रुकावट आती है, सरकारी मशीनरी और कर्मचारियों को चुनावी ड्यूटी में लगाना पड़ता है, जिससे जनसेवाएं प्रभावित होती हैं। खास तौर पर शिक्षकों को चुनावी ड्यूटी में लगाने से स्कूलों की पढ़ाई बाधित होती है और बच्चों की शिक्षा पर असर पड़ता है।


जन समर्थन और विशेषज्ञों की राय से मजबूत हुआ प्रस्ताव

भट्ट ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गठित उच्च स्तरीय समिति, जिसकी अध्यक्षता पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने की, ने इस विधेयक पर गहराई से विचार किया। इस समिति ने 62 राजनीतिक दलों से राय मांगी, जिनमें से 32 दलों ने समर्थन किया और केवल 15 ने विरोध। इसके अलावा समिति ने चार पूर्व मुख्य न्यायाधीशों, नौ हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों, चुनाव आयुक्तों, बार काउंसिल, फिक्की, एसोचैम, और जनता से भी सुझाव लिए। भट्ट ने बताया कि 83 प्रतिशत आम लोगों ने इस विधेयक का समर्थन किया।


कांग्रेस और INDI गठबंधन पर साधा निशाना

भट्ट ने कांग्रेस और INDI गठबंधन पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह वही पार्टियां हैं जो 1952 से 1967 तक इस प्रणाली के तहत चुनाव लड़ती और जीतती रही हैं, लेकिन अब राजनीतिक स्वार्थ के चलते इसका विरोध कर रही हैं। उन्होंने कांग्रेस पर धारा 356 का दुरुपयोग कर बार-बार राज्यों में सरकारें गिराने और देश को चुनावी दलदल में फंसाने का आरोप भी लगाया।

उन्होंने याद दिलाया कि 2015 में कांग्रेस नेता ई.एम. नचियप्पन की अध्यक्षता में बनी संसदीय समिति ने भी “एक राष्ट्र, एक चुनाव” प्रणाली को व्यवहारिक और प्रभावी बताया था।

महेंद्र भट्ट का मानना है कि “एक राष्ट्र, एक चुनाव” से न केवल चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्थिरता आएगी, बल्कि देश के समय, धन और संसाधनों की बचत होगी, जो सीधे-सीधे आम जनता के कल्याण में लगेगी। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत एक एकीकृत चुनाव प्रणाली की ओर कदम बढ़ाए और एक सशक्त, विकसित राष्ट्र की दिशा में आगे बढ़े।

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