गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस पर सीएम धामी ने ननकाना साहिब गुरुद्वारे में टेका मत्था, प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना

काशीपुर/नानकमत्ता: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को ननकाना साहिब बड़ा गुरुद्वारा, नानकमत्ता पहुंचकर मत्था टेका और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी को शत-शत नमन करते हुए कहा कि उनका बलिदान मानवता और धर्म की रक्षा का अद्वितीय उदाहरण है।

नगर कीर्तन का किया स्वागत

सीएम धामी ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, अमृतसर द्वारा आयोजित शहीदी नगर कीर्तन यात्रा का स्वागत किया। यह यात्रा असम के श्री धोबड़ी साहिब से प्रारंभ होकर विभिन्न राज्यों से गुजरते हुए श्री आनंदपुर साहिब तक पहुंचेगी, जो लगभग 2500 किमी लंबी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, एकता और गुरु साहिब के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का अभियान है।

गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान का स्मरण

सीएम धामी ने अपने संबोधन में गुरु तेग बहादुर जी के जीवन और बलिदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मात्र 14 वर्ष की आयु में ही गुरु तेग बहादुर जी ने अपने पिता के साथ मुगलों के खिलाफ युद्ध में अद्वितीय साहस दिखाया था, जिसके बाद उनका नाम “तेग बहादुर” पड़ा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि जब औरंगजेब ने कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार कर उन्हें जबरन धर्म परिवर्तन के लिए विवश किया, तब गुरु तेग बहादुर जी ने आवाज बुलंद की –
“मैं हिंदुओं का पीर हूँ, किसी हिन्दू से पहले मुझे मुस्लिम धर्म कबूल करा कर दिखाओ।”

उनकी इस जिद पर उन्हें दिल्ली बुलवाकर बंदी बना लिया गया और कठोर यातनाएं दी गईं। उनके शिष्यों को भी बर्बर अत्याचार सहने पड़े – किसी को खौलते तेल में डाला गया, किसी को आरी से चीर दिया गया और किसी को जिंदा जलाया गया। अंततः गुरु तेग बहादुर जी का शीश काट दिया गया, लेकिन उनका साहस और बलिदान अमर हो गया।

सीएम धामी ने कहा कि गुरु साहिब के बलिदान ने दुनिया को सिखाया कि धर्म और सत्य की रक्षा के लिए प्राण देना पुण्य है और अत्याचार के सामने झुकना अधर्म है। यही कारण है कि उन्हें आज भी “हिंद दी चादर” के नाम से याद किया जाता है।

समारोह में मौजूद गणमान्य

इस अवसर पर विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, मेयर दीपक बाली, दर्जा राज्यमंत्री अनिल कपूर डब्बू, फरजाना बेगम, पूर्व विधायक हरभजन सिंह चीमा, राजेश शुक्ला, जिलाध्यक्ष मनोज पाल, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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