मौनी अमावस्या पर हरिद्वार में आस्था का सैलाब, हर की पैड़ी पर उमड़े श्रद्धालु

हरिद्वार।
माघ मास की अमावस्या, जिसे मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है, के पावन अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार में आस्था और भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ हर की पैड़ी सहित तमाम गंगा घाटों पर उमड़ पड़ी। सुबह करीब 4 बजे से ही श्रद्धालु गंगा तटों पर पहुंचकर पवित्र डुबकी लगाते नजर आए। स्नान के दौरान घाट “हर-हर गंगे” और “जय मां गंगे” के जयकारों से गूंज उठे।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या पर मौन रहकर गंगा स्नान, दान और तप का विशेष महत्व होता है। इसी आस्था के चलते उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे और पुण्य अर्जित किया।

कुंभ स्नान के समान फल देने वाला पर्व

नारायणी शिला मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित मनोज त्रिपाठी ने मौनी अमावस्या के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि माघ मास की अमावस्या अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है।
उन्होंने कहा,
“आज के दिन गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने से कुंभ स्नान के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस दिन सभी देवी-देवता और अदृश्य ऋषि-मुनि भी धरती पर स्नान करने आते हैं।”

उन्होंने आगे बताया कि गंगा स्नान के बाद तिल, गुड़, अन्न, गर्म वस्त्र और दान-दक्षिणा करने से सहस्त्र वर्षों तक पुण्यफल प्राप्त होता है।

ठंड के कारण सुबह कम दिखी भीड़

हालांकि सुबह के समय कड़ाके की ठंड के चलते श्रद्धालुओं की संख्या अपेक्षाकृत कम नजर आई, लेकिन स्नान का सिलसिला लगातार जारी रहा। प्रशासन का अनुमान है कि धूप निकलने के साथ-साथ श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा होगा।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

स्नान पर्व को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। हर की पैड़ी और अन्य प्रमुख घाटों पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।

नारायणी शिला मंदिर में उमड़ी भीड़

अमावस्या के अवसर पर नारायणी शिला मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। धार्मिक मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान, पूजन और दान करने से उन्हें शांति प्राप्त होती है।
इसी विश्वास के चलते दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु मंदिर में पूजा-अर्चना करते नजर आए।

आस्था, तप और दान का संगम

मौनी अमावस्या का यह पर्व हरिद्वार में आस्था, मौन, तप और दान का अनुपम संगम बनकर सामने आया। गंगा स्नान के साथ-साथ श्रद्धालुओं ने जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दान देकर पुण्य अर्जित किया।

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