नैनीताल में रिकॉर्ड 174 मिमी बारिश, फ्लैश फ्लड से सड़कें जलमग्न – खतरे के निशान के करीब पहुंची नैनीझील
नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल में बीते 24 घंटे के भीतर हुई 174 मिलीमीटर (मिमी) बारिश ने पिछले रिकॉर्ड तोड़ दिए। आमतौर पर यहां 10-15 मिमी बारिश सामान्य मानी जाती है और 50-60 मिमी को भारी बारिश की श्रेणी में रखा जाता है, लेकिन सोमवार को हुई यह भारी बरसात शहर और आसपास के क्षेत्रों के लिए आफत बनकर आई।
फ्लैश फ्लड से बिगड़े हालात
लगातार बरसात के चलते शहर की सड़कें नदियों-नालों में तब्दील हो गईं। जगह-जगह बने नाले और नालियां बारिश का पानी सीधे नैनीझील में पहुंचा रहे हैं। अचानक बढ़े जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए झील के निकासी गेट खोलने पड़े।
विशेषज्ञ बताते हैं कि यह स्थिति फ्लैश फ्लड जैसी होती है। तेज रफ्तार से गिरा पानी ढलानों पर बहता हुआ सीधे झील में पहुंचता है। पहले जब सड़कों पर कच्ची मिट्टी और ईंटें होती थीं, तो पानी धीरे-धीरे जमीन में समा जाता था और महीनों बाद नैनीझील के प्राकृतिक स्रोतों को पुनर्जीवित करता था। लेकिन अब पक्की सड़कों और शहरीकरण के कारण बारिश का पानी सीधे बहकर निकल जाता है।
नैनीझील का जलस्तर खतरे के करीब
सिंचाई विभाग के अनुसार, नैनीझील का जलस्तर वर्तमान में 10 फीट 2 इंच दर्ज किया गया है।
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12 फीट पर झील को खतरे की श्रेणी में माना जाता है।
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जलस्तर 10 फीट पार करते ही सिंचाई विभाग को निकासी गेट खोलने पड़ते हैं, ताकि झील का संतुलन बना रहे।
मानसून का आंकड़ा
सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, जनवरी से अब तक नैनीताल में 1935 मिमी बारिश दर्ज हो चुकी है। यह मानसून सीजन का औसत आंकड़ा पार करने के करीब है।
जल संकट की आशंका भी
विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के मौसम में झील लबालब हो जाती है, लेकिन शीतकालीन बारिश (विंटर रेन) की कमी और प्राकृतिक स्रोतों के बंद होने से मार्च से ही झील का जलस्तर घटने लगता है।
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गर्मियों में पीने के पानी की आपूर्ति इसी झील पर निर्भर रहती है।
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बढ़ता शहरीकरण और प्राकृतिक जलस्रोतों का रुकना आने वाले समय में जल संकट को गहरा सकता है।