उत्तराखंड में बड़ा शिक्षा बदलाव: मदरसा बोर्ड 30 जून तक समाप्त, सभी अल्पसंख्यक संस्थान मुख्यधारा बोर्ड से जुड़ेंगे
देहरादून: धामी सरकार ने राज्य में अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की दिशा में अहम कदम बढ़ाते हुए अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक, 2025 को लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। सभी औपचारिकताएं पूरी करते हुए उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन कर दिया गया है। इसके साथ ही स्पष्ट हो गया है कि 30 जून 2026 को उत्तराखंड मदरसा बोर्ड पूरी तरह समाप्त हो जाएगा और 1 जुलाई 2026 से नई व्यवस्था लागू होगी।
मुख्यधारा शिक्षा से जुड़ेंगे मदरसे
नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों, जिनमें मदरसे भी शामिल हैं, को अब
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उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता
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और उत्तराखंड विद्यालय शिक्षा बोर्ड से संबद्धता
लेनी अनिवार्य होगी। इसके साथ ही इन संस्थानों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा लागू किया जाएगा।
सरकार का दावा है कि यह कदम अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और समान अवसर वाली शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
देश में पहला राज्य बनने का दावा
सरकारी जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड ऐसा पहला राज्य बनने जा रहा है जहां मदरसा बोर्ड को समाप्त कर सभी मदरसों को एक एकीकृत शिक्षा ढांचे में लाया जा रहा है।
प्राधिकरण का गठन
गठित उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की संरचना इस प्रकार है—
अध्यक्ष:
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प्रो. सुरजीत सिंह गांधी (सेवानिवृत्त), बीएसएम पीजी कॉलेज, रुड़की
सदस्य:
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डॉ. राकेश कुमार जैन (हरिद्वार)
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डॉ. सैय्यद अली हमीद (अल्मोड़ा)
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प्रो. पेमा तेनजिन (चमोली)
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प्रो. गुरमीत सिंह (मुरादाबाद)
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डॉ. एल्बा मन्ड्रेले (बागेश्वर)
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प्रो. रोबिना अमन (अल्मोड़ा)
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चंद्रशेखर भट्ट (पूर्व सचिव)
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राजेंद्र सिंह बिष्ट (पिथौरागढ़)
पदेन सदस्य:
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महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा
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निदेशक, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT)
पदेन सदस्य सचिव:
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निदेशक, अल्पसंख्यक कल्याण, उत्तराखंड