देहरादून। उत्तराखण्ड में जनगणना—2027 की प्रक्रिया का आज विधिवत शुभारंभ हो गया। Gurmit Singh (से.नि.) ने लोक भवन में स्व—गणना के माध्यम से इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत की। इसके साथ ही प्रदेश में जनगणना के प्रथम चरण की गतिविधियाँ भी प्रारंभ हो गई हैं।
इस बार की जनगणना कई मायनों में विशेष है, क्योंकि यह भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी। इसमें डेटा संग्रहण पूरी तरह डिजिटल उपकरणों के माध्यम से किया जाएगा। साथ ही नागरिकों को स्व—गणना (Self Enumeration) की सुविधा भी दी गई है, जो एक सुरक्षित और वेब—आधारित प्रणाली पर आधारित है।
राज्यपाल ने प्रदेशवासियों से इस महत्वपूर्ण अभियान में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि नागरिक स्व—गणना के माध्यम से स्वयं और अपने परिवार की सटीक एवं पूर्ण जानकारी दर्ज करें, जिससे जनगणना के आंकड़े अधिक विश्वसनीय बन सकें।
उन्होंने यह भी बताया कि जनगणना के लिए तैयार किया गया वेब पोर्टल बेहद सरल और यूजर फ्रेंडली है, जिससे आम व्यक्ति भी आसानी से अपनी जानकारी भर सकता है। राज्यपाल ने युवाओं और सामाजिक संस्थाओं से विशेष आग्रह किया कि वे इस प्रक्रिया में सहयोग करें और डिजिटल माध्यमों के उपयोग में अन्य लोगों की मदद करें, ताकि कोई भी नागरिक इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया से वंचित न रह जाए।
जनगणना कार्य निदेशालय, गृह मंत्रालय, भारत सरकार की निदेशक Iva Ashish Srivastava ने जानकारी देते हुए बताया कि उत्तराखण्ड में प्रथम चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का कार्य 25 अप्रैल से 24 मई 2026 तक 30 दिनों की अवधि में पूरे राज्य में संचालित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि घर-घर सर्वेक्षण से पहले प्रदेशवासियों को 10 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026 तक स्व—गणना की सुविधा प्रदान की गई है। इस दौरान नागरिक पोर्टल पर अपने मोबाइल नंबर और आवश्यक विवरण के माध्यम से लॉग इन कर स्वयं एवं अपने परिवार की जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज कर सकते हैं।
इस अवसर पर सचिव दीपक कुमार सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।