उत्तराखंड के UCC पर उच्च न्यायालय में राज्य के प्रमुख तर्क
क्या Uniform Civil Code (UCC) से राष्ट्रीय एकता और लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा?
उत्तराखंड उच्च न्यायालय में यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code) 2024 के प्रावधानों को चुनौती देने वाली पाँच याचिकाओं के जवाब में राज्य सरकार ने एक विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत किया है। इस हलफनामे में राष्ट्रीय एकता, लैंगिक समानता, आपराधिक अपराधों की रोकथाम, और लिव-इन रिलेशनशिप से जन्मे बच्चों की सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जोर दिया गया है।
क्या Privacy का अधिकार Absolute है?
सूत्रों के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार के हलफनामे में तर्क दिया गया है कि Privacy का अधिकार Absolute नहीं है। संविधान के निर्माताओं, जिनमें Dr. B.R. Ambedkar जैसे दूरदर्शी नेता शामिल थे, ने राष्ट्रीय एकता और अखंडता को बढ़ावा देने के लिए UCC की आवश्यकता को पहचाना था। शाह बानो केस (1985) और जोस पाउलो कूटिन्हो केस (2019) जैसे मामलों का हवाला देते हुए हलफनामे में बताया गया कि विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप की अनिवार्य रजिस्ट्रेशन जैसी व्यवस्थाएँ लैंगिक समानता और सामाजिक सुधार के लिए जरूरी हैं।
क्या अनिवार्य रजिस्ट्रेशन निजता का उल्लंघन है?
हलफनामे में यह भी कहा गया है कि अनिवार्य रजिस्ट्रेशन के माध्यम से आपराधिक गतिविधियों को रोका जा सकता है। राज्य का मानना है कि विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन सामाजिक स्थिरता और पारिवारिक संबंधों को मजबूत करेगा। इसके अलावा, राज्य ने यह भी तर्क दिया कि कानून निर्माता और नीति निर्माता सामाजिक मुद्दों से निपटने में सक्षम हैं, और न्यायालय का हस्तक्षेप तभी उचित है जब मौलिक अधिकार या संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन हो।
क्या UCC से महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा होगी?
राज्य ने कहा कि विवाह से बाहर जन्मे बच्चों और “परित्यक्त” महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए UCC जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि विवाह से बाहर जन्मे बच्चों को अवैध नहीं माना जा सकता, लेकिन बिना दस्तावेजों के पितृत्व और उत्तराधिकार स्थापित करने में कठिनाई होती है। UCC इन समस्याओं का समाधान करेगा।
Aadhaar और Surveillance के मुद्दे पर राज्य का रुख
हलफनामे में यह भी स्पष्ट किया गया है कि UCC का Aadhaar से लिंक होना निगरानी का प्रयास नहीं है, बल्कि सिर्फ रिकॉर्ड बनाए रखने के लिए है। राज्य का कहना है कि एकत्रित डेटा को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त प्रावधान हैं और सूचनाएँ पुलिस के साथ साझा नहीं की जाएंगी।
Puttaswamy Judgment (2017) का हवाला
राज्य ने Puttaswamy Judgment (2017) का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी कानून को निजता में हस्तक्षेप करने के लिए तीन शर्तें पूरी करनी होंगी—विधायिका द्वारा बनाया गया हो, वैध राज्य हित में हो, और अनुपातहीन न हो। राज्य का दावा है कि UCC इन सभी शर्तों को पूरा करता है।
UCC का Extraterritorial Application: विवाद का कारण?
हलफनामे में बताया गया कि राज्य को अपने नागरिकों के लिए राज्य के बाहर भी कानून लागू करने का अधिकार है, बशर्ते राज्य और नागरिक के बीच संबंध हो। यह प्रावधान विवादित है, लेकिन राज्य इसे उचित ठहराता है।
विवाह के अनिवार्य रजिस्ट्रेशन पर राज्यों का दृष्टिकोण
राज्य ने बताया कि भारत के 15 राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश पहले ही विवाह का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन कर चुके हैं। राज्य का दावा है कि इसका उद्देश्य सिर्फ विवाह की स्थिरता सुनिश्चित करना है, न कि निगरानी करना।
Uttarakhand Uniform Civil Code Act, 2024 के प्रावधानों पर राज्य का पक्ष यह है कि यह कानून राष्ट्रीय एकता, लैंगिक समानता, और सामाजिक सुधार के उद्देश्य से लाया गया है। हालांकि, विरोधियों का मानना है कि यह निजता के अधिकार का उल्लंघन करता है। अब देखना यह है कि उच्च न्यायालय इस मामले में क्या निर्णय लेता है। अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होगी।
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