सड़क सुविधा के अभाव में घायल महिला को 5 किमी डोली पर ढोया, पिथौरागढ़ के ग्रामीणों की बेबसी बनी सुर्खी
पिथौरागढ़। सीमांत जनपद पिथौरागढ़ आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। मदकोट क्षेत्र के गोल्फा गांव में हाल ही में सामने आया एक वाकया पहाड़ के ग्रामीण जीवन की कठिनाइयों और सरकारी दावों की हकीकत उजागर करता है। यहां 65 वर्षीय खिला देवी पत्नी लक्ष्मण सिंह कोरंगा जंगल में घास काटते समय गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गईं। सड़क सुविधा न होने के कारण ग्रामीणों को मजबूरी में उन्हें लकड़ी और चादर से बनी डोली (डंडी-कंडी) पर लादकर पाँच किलोमीटर दूर सड़क तक पहुंचाना पड़ा।
ग्रामीणों की मजबूरी बनी डोली
गांव से सड़क की दूरी लगभग पाँच किलोमीटर है और रास्ता ऊबड़-खाबड़ खड़ंजा मार्ग से होकर गुजरता है, जहाँ किसी वाहन की पहुंच संभव नहीं। ऐसे में ग्रामीण युवाओं ने तत्परता दिखाते हुए लकड़ी के डंडों और चादर से एक अस्थायी डोली बनाई और घायल महिला को कंधों पर उठाकर पैदल चल पड़े। लगभग दो घंटे की कठिन पैदल यात्रा के बाद जब वे सड़क तक पहुंचे तो टैक्सी से उन्हें 120 किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ जिला अस्पताल भेजा गया।
वर्षों से अधूरी मांग
ग्राम प्रधान मुकेश सिंह और सरपंच डिगर सिंह ने बताया कि गांव के लोग सड़क, संचार और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीने को मजबूर हैं। पिछले कई वर्षों से बार-बार मांग उठाने के बावजूद सरकार और प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य जगत मर्तोलिया का कहना है कि गोल्फा गांव को सड़क से जोड़ने की मांग पिछले एक दशक से अधिक समय से उठ रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
अधूरी योजनाएं और अधूरा विकास
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जल जीवन मिशन के तहत गांव में नल तो लगा दिए गए हैं, लेकिन पानी नहीं आता।
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संचार व्यवस्था इतनी खराब है कि ग्रामीणों को मोबाइल नेटवर्क के लिए ऊँची पहाड़ियों पर चढ़ना पड़ता है।
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गोल्फा, तोमिक और बोना जैसे गांवों की करीब 2,000 की आबादी इन्हीं समस्याओं से जूझ रही है।