उत्तराखण्ड में भूजल संरक्षण की ऐतिहासिक पहल, गैरसैंण से शुरू हुई “डायरेक्ट इंजेक्शन योजना”
भराड़ीसैंण, 19 जुलाई 2025। उत्तराखण्ड आज जल संरक्षण की दिशा में एक नए इतिहास का साक्षी बना। विधानसभा भवन, भराड़ीसैंण में आयोजित भव्य समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय, जौलीग्रांट के सहयोग से “डायरेक्ट इंजेक्शन जल स्रोत पुनर्भरण योजना” का शुभारंभ किया।
कार्यक्रम में वन मंत्री सुबोध उनियाल, कृषि मंत्री गणेश जोशी, कई विधायक, वरिष्ठ अधिकारी और विश्वविद्यालय की तकनीकी टीम मौजूद रही।
क्यों जरूरी है यह पहल?
उत्तराखण्ड की लगभग 80% पेयजल जरूरतें पारंपरिक झरनों और धाराओं पर निर्भर हैं। लेकिन पिछले दो दशकों में भूजल स्तर में 40% तक गिरावट ने संकट को और गहरा कर दिया। हजारों हैंडपंप और जल स्रोत सूख चुके हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में पानी की आपूर्ति बड़ी चुनौती बन गई है।
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण के मार्गदर्शन और संकल्प से यह परियोजना मूर्त रूप ले पाई। 8 जुलाई 2025 को अंतर्राष्ट्रीय संसदीय अध्ययन, शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान, भराड़ीसैंण और स्वामी राम विश्वविद्यालय के बीच हुए समझौते (MoU) ने इसके क्रियान्वयन का रास्ता खोला।

मुख्यमंत्री का संकल्प
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा –
“पेयजल की उपलब्धता हर नागरिक का अधिकार है। हमारी सरकार तकनीकी नवाचारों को अपनाकर जल संकट दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह योजना केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड को जल संरक्षण में आत्मनिर्भर बनाने का ऐतिहासिक कदम है।”
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने इसे “भविष्य की जल सुरक्षा की नींव” बताते हुए कहा कि भूजल पुनर्भरण उत्तराखण्ड के लिए जीवनरेखा साबित होगा।
कैसे काम करेगी यह योजना?
“डायरेक्ट इंजेक्शन जल स्रोत पुनर्भरण योजना” के तहत –
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उपचारित वर्षा जल को निष्क्रिय हैंडपंपों में इंजेक्ट किया जाएगा।
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यह तकनीक सीधे भूजल भंडार तक पानी पहुंचाती है।
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पहले चरण में गैरसैंण और चौखुटिया ब्लॉक के 20 हैंडपंपों को पुनर्जीवित किया जाएगा।
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विश्वविद्यालय की टीम—प्रो. एच.पी. उनियाल, नितेश कौशिक, सुजीत थपलियाल, राजकुमार वर्मा, अतुल उनियाल, अभिषेक उनियाल और शक्ति भट्ट—ने इस प्रक्रिया का तकनीकी विवरण प्रस्तुत किया।
ग्रामीणों के लिए जीवनदायिनी
कार्यक्रम से उन गांवों के ग्रामीण भी ऑनलाइन जुड़े, जहां यह तकनीक लागू की गई है। ग्रामीणों ने साझा किया कि –
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पहले गर्मियों में पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी।
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अब घर के पास पुनर्जीवित हैंडपंप से पानी उपलब्ध हो रहा है।
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इसे उन्होंने “जीवनदायिनी योजना” बताया।
