धराली आपदा पर हाईकोर्ट सख्त: सरकार से मांगी राहत कार्यों की प्रगति रिपोर्ट

प्रभावितों को मूलभूत सुविधाएं देने के निर्देश

नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने उत्तरकाशी जिले के धराली क्षेत्र में 22 अगस्त को खीर गंगा नदी में आई विनाशकारी आपदा के बाद प्रभावितों को राहत और पुनर्वास न मिलने पर गंभीर रुख अपनाया है। न्यायालय ने राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर राहत एवं पुनर्वास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, प्रभावित लोगों को मूलभूत सुविधाएं — जैसे सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं — तत्काल उपलब्ध कराने के भी आदेश दिए गए हैं।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने की। अदालत ने कहा कि सरकार का दायित्व है कि आपदा प्रभावितों को जल्द से जल्द राहत पहुंचाई जाए और बुनियादी ढांचे की बहाली में देरी न हो। न्यायालय ने यह भी कहा कि जिन क्षेत्रों में विद्यालय और अस्पतालों को स्थानांतरित किया गया है, वहां स्थानीय लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।

धराली निवासी अधिवक्ता सिद्धार्थ नेगी द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि अगस्त माह में आई भीषण आपदा के बाद धराली में सड़कें अब भी क्षतिग्रस्त हैं, जिसके चलते राहत सामग्री और आवश्यक सामान गांव तक नहीं पहुंच पा रहा है। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि स्कूल और स्वास्थ्य केंद्रों के स्थानांतरण से बच्चों और बुजुर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

याचिकाकर्ता ने मांग की है कि राज्य सरकार आपदा प्रभावितों के लिए त्वरित राहत उपाय करे, क्षेत्र में संचार और परिवहन व्यवस्था दुरुस्त करे और स्थायी पुनर्वास की दिशा में ठोस कदम उठाए।

अदालत ने राज्य सरकार से जवाब तलब करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि राहत कार्यों में लापरवाही पाई गई, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। अब मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

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