पानी को तरसता गंगोलीहाट का बुंगली गांव, ₹100 में जार खरीदने को मजबूर ग्रामीण

पिथौरागढ़। एक ओर उत्तराखंड में मौसम के बदलते मिजाज और बारिश से मुश्किलें बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर कई क्षेत्रों में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। गर्मी की शुरुआत से पहले ही जल स्रोत सूखने लगे हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में हालात गंभीर होते जा रहे हैं।

बुंगली गांव में गहराया जल संकट

गंगोलीहाट के दूरस्थ बेलपट्टी क्षेत्र के बुंगली गांव में पानी की भारी किल्लत बनी हुई है। गांव में नल सूखे पड़े हैं और 325 परिवारों को पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। हालात इतने खराब हैं कि ग्रामीण ₹100 खर्च कर घोड़ों और खच्चरों के जरिए 70 लीटर पानी मंगाने को मजबूर हैं।

असमान जल वितरण से बढ़ी परेशानी

गांव के केवल 25 परिवार ही जल संस्थान की योजना से जुड़े हैं। इनमें भी लाइन के शुरुआती घरों को करीब 80 लीटर पानी मिल रहा है, जबकि अंतिम छोर पर रहने वाले परिवारों को महज 10 लीटर पानी ही नसीब हो रहा है।

ग्रामीण हेमा परगाई के अनुसार, इतने बड़े गांव के लिए आज तक कोई ठोस पेयजल योजना लागू नहीं हो पाई है।

सूखते जल स्रोत और महंगा पानी

गांव में करीब 20 नौले (प्राकृतिक जल स्रोत) हैं, लेकिन गर्मी के मौसम में अधिकांश सूख जाते हैं। ऐसे में ग्रामीण दाडू गाड़, फॉल गाड़ और धुनघाट जैसे दूरस्थ स्रोतों से पानी मंगवाते हैं।

घोड़ों और खच्चरों के जरिए ढोया गया पानी ₹100 में 35-35 लीटर के दो जार के रूप में खरीदा जा रहा है, जो ग्रामीणों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहा है।

रोजमर्रा की जिंदगी पर असर

पानी की कमी का असर गांव की दिनचर्या पर साफ दिख रहा है। कई परिवारों में एक सदस्य का पूरा समय केवल पानी लाने में ही बीत जाता है।

यदि घर में मेहमान आ जाएं या कोई सामाजिक या धार्मिक कार्यक्रम हो, तो स्थिति और भी कठिन हो जाती है।

निजी साधनों से भी जुगाड़

जिन ग्रामीणों के पास निजी वाहन हैं, वे कई किलोमीटर दूर कुंदगाड़ से पानी लाकर अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं, जबकि बाकी लोग पशुओं के सहारे जल आपूर्ति पर निर्भर हैं।

अधूरी योजना से उम्मीदें अधर में

ग्रामीणों ने बेलपट्टी पंपिंग योजना को जल्द पूरा करने की मांग की है। यह योजना सरयू नदी से प्रस्तावित है, जिसकी लागत करीब ₹44.56 करोड़ है और इससे 49 राजस्व गांवों को लाभ मिलना है।

हालांकि, योजना का निर्माण कार्य समय पर पूरा न होने के कारण लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है।

अवर अभियंता रितेश भट्ट के अनुसार, योजना का ट्रायल चल रहा है और आठ गांवों में पानी पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि अगले तीन महीने में बुंगली क्षेत्र को भी पानी मिलने लगेगा।

अन्य क्षेत्रों में भी हालात खराब

बेरीनाग नगर क्षेत्र में भी पेयजल संकट बना हुआ है, जहां सप्ताह में केवल दो दिन ही पानी की सप्लाई हो रही है।

वहीं, बेरीनाग तहसील मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर उडियारी गांव में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। ग्रामीणों ने तीन साल पहले पेयजल समस्या को लेकर धरना-प्रदर्शन और सांकेतिक चक्का जाम तक किया था, लेकिन आज तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

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