उधमसिंह नगर में आपदा राहत अनाज घोटाले के दस्तावेजों पर उठा संदेह—हाईकोर्ट ने पूछा दो डिस्पैच रजिस्टर कैसे, जिम्मेदार अधिकारी व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश
नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय में वर्ष 2021 में आपदा पीड़ितों के लिए भेजे गए अनाज के सड़ने और उससे जुड़े दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताओं का मामला लगातार गहराता जा रहा है। अदालत ने सुनवाई के दौरान यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब सरकारी कार्यालयों में डिस्पैच रजिस्टर केवल एक ही होता है, तो इस मामले में दो डिस्पैच रजिस्टर कैसे पाए गए। न्यायालय ने इसे अत्यंत गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों को आगामी मंगलवार को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने और स्पष्ट स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए हैं।
मामले की सुनवाई आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई, जिसमें उधमसिंह नगर के जिलाधिकारी अदालत के समक्ष प्रस्तुत हुए। उन्होंने अपना डिस्पैच रजिस्टर न्यायालय को दिखाया, जिसे अदालत ने ध्यानपूर्वक देखा। लेकिन सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि एक और डिस्पैच रजिस्टर मौजूद है, जिसे बाद में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। दोनों रजिस्टरों का अवलोकन करने पर अदालत ने गंभीर अनियमितताओं को नोट किया और सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकारी प्रक्रिया के अनुसार एक ही डिस्पैच रजिस्टर होना चाहिए, ऐसे में दो रजिस्टरों की मौजूदगी कई सवाल खड़े करती है।
हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख तय करते हुए स्पष्ट कहा है कि खाद्य विभाग के कमिश्नर, जिलाधिकारी उधमसिंह नगर, जिला पूर्ति अधिकारी और संबंधित डिस्पैच क्लर्क सभी व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हों और इस अनियमितता के पीछे की पूरी जानकारी विस्तृत रूप से प्रस्तुत करें। अदालत ने कहा कि दस्तावेजों के स्तर पर गड़बड़ी होना स्वयं में गंभीर आरोप है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यह मामला हरिद्वार निवासी अभिजीत द्वारा दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2021 में सस्ता गल्ला योजना के तहत वितरित किए जाने वाले लगभग 99 कुंतल अनाज को उचित रखरखाव न मिलने के कारण वह पूरी तरह सड़ गया। यह अनाज आपदा राहत सामग्री के रूप में भेजा गया था, जिसे जरूरतमंदों तक पहुंचना चाहिए था, लेकिन लापरवाही के चलते वह अनुपयोगी हो गया। जांच के बाद जिलाधिकारी उधमसिंह नगर ने संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों से इसकी वसूली के आदेश जारी किए थे, लेकिन बाद में खाद्य आपूर्ति कमिश्नर ने इस वसूली को माफ कर दिया।
याचिकाकर्ता ने न्यायालय से अनुरोध किया है कि इस पूरे घोटाले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए और सरकारी धन व अनाज के नुकसान की पूरी भरपाई सुनिश्चित की जाए। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपियों द्वारा राशन के अलावा अन्य वित्तीय मदों का भी दुरुपयोग किया गया है।
हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट कर दिया है कि आपदा राहत सामग्री के दुरुपयोग को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। अब आगामी मंगलवार को अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति और उनके स्पष्टीकरण पर इस प्रकरण की आगे की दिशा निर्भर करेगी।
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