कर्णप्रयाग (चमोली)। उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक यात्रा नंदा देवी राजजात के आयोजन को लेकर एक बार फिर मतभेद सामने आ गए हैं। नंदा देवी मंदिर कुरुड़ के हक-हकूकधारियों और नंदा देवी राजजात समिति के बीच सर्वसम्मति नहीं बन पाई है। राजजात समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि नंदा देवी राजजात का आयोजन वर्ष 2027 में ही किया जाएगा, जबकि कुरुड़ स्थित नंदा सिद्धपीठ समिति ने इसी वर्ष 5 सितंबर से 20 सितंबर 2026 तक ‘बड़ी नंदा जात’ निकालने की घोषणा कर दी है।
राजजात समिति का स्पष्ट रुख
कर्णप्रयाग के नौटी गांव स्थित नंदा देवी मंदिर में वसंत पंचमी के अवसर पर मनौती (उच्याणा) पूजन के बाद आयोजित बैठक में राजजात समिति ने यह निर्णय लिया कि वर्ष 2026 में राजजात का आयोजन संभव नहीं है। समिति ने बताया कि पंचांग गणना और मलमास (अधिमास) के कारण इस वर्ष यात्रा की तिथियां अनुकूल नहीं बन पा रही हैं।
पंचांग गणना के बाद पं. एस. कोठियाल ने जानकारी दी कि इस वर्ष यात्रा की पूर्णता की तिथि 19 सितंबर तक पहुंच रही है। राजजात समिति के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुंवर ने बताया कि वर्ष 2014 में राजजात 4 सितंबर को समाप्त हो गई थी, लेकिन इस बार मलमास के कारण तिथियां लगभग 15 दिन आगे खिसक गई हैं, जिससे परंपरागत क्रम प्रभावित हो रहा है। इसी आधार पर इस वर्ष राजजात को स्थगित करने का निर्णय लिया गया है।
समिति के महामंत्री भुवन नौटियाल ने भी इस निर्णय पर सहमति जताई। वहीं, जिलाधिकारी चमोली गौरव कुमार ने भरोसा दिलाया कि वर्ष 2027 में प्रस्तावित राजजात के आयोजन में प्रशासन की ओर से हरसंभव सहयोग दिया जाएगा। समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि अगले वर्ष वसंत पंचमी के दिन राजजात का दिनपट्टा विधिवत जारी किया जाएगा।
कुरुड़ समिति ने इस वर्ष बड़ी जात का ऐलान
दूसरी ओर, नंदा सिद्धपीठ कुरुड़ में आयोजित बैठक में बड़ी नंदा जात आयोजन समिति ने पंचांग पूजा के बाद इसी वर्ष बड़ी जात निकालने की घोषणा कर दी। समिति के अध्यक्ष हरेंद्र सिंह रावत, नंदा देवी के खड़कधारी थोकदार वीरेंद्र सिंह रावत सहित हक-हकूकधारियों की मौजूदगी में गौड़ ब्राह्मणों ने 5 सितंबर से 20 सितंबर तक बड़ी नंदा जात के आयोजन की तिथि घोषित की।
कुरुड़ समिति के अनुसार, यह यात्रा नंदा सिद्धपीठ कुरुड़ से प्रारंभ होकर होमकुंड में पूर्ण होगी। नंदा देवी के पश्वा ने भी इस आयोजन पर सहमति जताई है। कुरुड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखवीर रौतेला ने कहा कि बड़ी नंदा जात आस्था और परंपरा से जुड़ी है, जिसे किसी भी परिस्थिति में रोका नहीं जा सकता। उन्होंने बताया कि देव डोलियों का रूट मैप भी तैयार कर लिया गया है और उसी के अनुसार डोलियां होमकुंड तक जाएंगी।
आस्था और परंपरा के बीच निर्णय
एक ओर जहां राजजात समिति पंचांग और परंपरागत गणनाओं के आधार पर आयोजन को 2027 तक टालने पर अडिग है, वहीं कुरुड़ समिति आस्था और परंपरा को प्राथमिकता देते हुए इसी वर्ष बड़ी जात निकालने पर कायम है। ऐसे में नंदा देवी राजजात को लेकर यह असहमति फिलहाल बनी हुई है और आने वाले समय में इस पर और चर्चा की संभावना है।
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