15 सूत्री मांगों को लेकर दिव्यांगजन मुख्यमंत्री आवास पर धरने पर बैठे, पुलिस ने किया गिरफ्तार

आउट ऑफ टर्न जॉब, पेंशन बढ़ोतरी, बैकलॉग भर्ती समेत कई प्रमुख मुद्दों पर उठाई आवाज

देहरादून। उत्तराखंड में दिव्यांगजन अपनी उपेक्षित मांगों को लेकर एक बार फिर सड़क पर उतर आए। सोमवार को उत्तराखंड दिव्यांग व्रांति महाआंदोलन के बैनर तले बड़ी संख्या में दिव्यांगजन पुलिस को चकमा देकर सीधे मुख्यमंत्री आवास पहुंच गए। वहां उन्होंने धरना प्रदर्शन शुरू किया और सरकार से अपनी 15 सूत्री मांगों को तत्काल लागू करने की मांग की। हालांकि, कुछ देर बाद पुलिस ने सभी दिव्यांगजनों को गिरफ्तार कर पुलिस लाइन ले जाया गया।

दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए नौकरी की मांग

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पैरा नेशनल चैम्पियनशिप में पदक विजेता खिलाड़ियों को “आउट ऑफ टर्न जॉब” का अवसर दिया जाए। साथ ही उन्हें सामान्य खिलाड़ियों की तरह सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

आरक्षण और रोजगार के मुद्दे

दिव्यांगजनों ने राज्य की अधीन सेवाओं में चार प्रतिशत आरक्षण के अंतर्गत रिक्त पड़े बैकलॉग पदों को तुरंत भरे जाने की मांग की। उनका कहना था कि यह भर्ती दो माह के भीतर पूरी की जानी चाहिए।
इसके अलावा, प्राइवेट सेक्टर में भी दिव्यांगजनों के लिए चार प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जाए ताकि उन्हें योग्यता के आधार पर रोजगार मिल सके।

पेंशन और स्वरोजगार की व्यवस्था

दिव्यांगजनों ने राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए मासिक पेंशन को 5000 रुपये प्रतिमाह करने की मांग रखी। साथ ही, स्वरोजगार हेतु मिलने वाले ऋण को ब्याज मुक्त किए जाने की भी मांग उठाई। उन्होंने कहा कि समाज कल्याण विभाग से मिलने वाली मासिक पेंशन को गारंटी के रूप में मान्यता दी जाए ताकि दिव्यांगों को ऋण और अन्य योजनाओं में आसानी हो।

निदेशालय और सुविधाओं की आवश्यकता

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि अन्य राज्यों की तरह उत्तराखंड में भी दिव्यांगजन निदेशालय का गठन किया जाए। साथ ही, आईएसबीटी देहरादून के पास दिव्यांगजनों के ठहरने के लिए एक विश्राम गृह का निर्माण कराया जाए।

विशेष स्कूल और फड़/खोखा आवंटन

मांगपत्र में यह भी कहा गया कि ऑटिज्म और मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण दिव्यांग बच्चों के लिए सरकार विशेष स्कूल खोले और उनकी देखभाल एवं रोजगार की उचित व्यवस्था करे।
इसके अलावा, वर्ष 2016 में दिव्यांगों के लिए रोजगार हेतु फड़/खोखा आवंटन का शासनादेश जारी हुआ था, लेकिन आज तक उन्हें इसका लाभ नहीं मिला है। आंदोलनकारियों ने कहा कि शासनादेश का पालन कर दिव्यांगजनों को फड़/खोखा उपलब्ध कराए जाएं।

गिरफ्तारी के बाद आक्रोश

धरना प्रदर्शन के दौरान दिव्यांगजनों ने कहा कि उनकी बातें वर्षों से अनसुनी की जा रही हैं। सरकार ने कई बार आश्वासन दिए, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ नहीं हुआ। धरने के बाद पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर पुलिस लाइन पहुंचाया। फिलहाल दिव्यांगजन संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।

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