देहरादून में शिक्षक बना करोड़ों का जालसाज – सरकारी योजनाओं के नाम पर 47 करोड़ की ठगी, पत्नी के नाम पर खोली फर्जी कंपनी
देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक बड़ा चिटफंड घोटाला सामने आया है, जिसमें एक सरकारी शिक्षक ने 15,000 से अधिक लोगों से करीब 47 करोड़ रुपये की ठगी कर डाली। आरोपी ने अपनी पत्नी के नाम पर “दून समृद्धि निधि लिमिटेड” नामक फर्जी माइक्रोफाइनेंस कंपनी बनाकर यह ठगी की। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि घोटाले में शामिल अन्य लोगों की तलाश जारी है।
शिक्षक के भेष में जालसाज
देहरादून एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि आरोपी जगमोहन सिंह चौहान (55 वर्ष) पेशे से शिक्षक है। उसने अपने पद की आड़ में लोगों का विश्वास जीतकर उन्हें सरकारी योजनाओं में निवेश का लालच दिया। आरोपी ने “सुकन्या समृद्धि योजना, आरडी, एफडी और अन्य सरकारी निवेश योजनाओं” के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये जमा कराए।
जांच में खुलासा हुआ कि जगमोहन ने वर्ष 2022 में दून यूनिवर्सिटी रोड स्थित संस्कार एन्क्लेव में कंपनी का दफ्तर खोला था। वहां उसने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए ऊंचे ब्याज दरों और गारंटीड रिटर्न का लालच दिया।
पत्नी के नाम पर खोली थी कंपनी
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने अपनी पत्नी के नाम पर “दून समृद्धि निधि लिमिटेड” नाम से एक कंपनी रजिस्टर्ड कराई थी, जिसका पंजीकृत नाम “सर्व माइक्रोफाइनेंस इंडिया एसोसिएशन” था। इस कंपनी के जरिए वह खुद को सरकारी योजनाओं से जुड़ा बताता था और नकली दस्तावेज दिखाकर लोगों को भ्रमित करता था।
शुरुआती महीनों में निवेशकों को ब्याज का भुगतान कर उनका विश्वास जीता गया। बाद में, जैसे-जैसे लोगों की संख्या बढ़ी, ठगी का दायरा भी बढ़ता गया। पुलिस के अनुसार, अब तक करीब 47 करोड़ रुपये की ठगी की पुष्टि हुई है, जबकि कुल घोटाला 150 करोड़ रुपये तक पहुंचने की आशंका है।
15,000 से अधिक लोग बने शिकार
आरोपी ने दावा किया था कि उसका कुमाऊं क्षेत्र में रियल एस्टेट कारोबार है, जहां निवेश पर बड़े रिटर्न की गारंटी दी जाती है। पहले कुछ लोगों को रिटर्न देकर उसने विश्वास बनाया, फिर धीरे-धीरे हजारों लोगों को अपने जाल में फंसा लिया।
करीब 15,000 निवेशकों ने अपनी जमा पूंजी और पेंशन फंड इस योजना में लगा दिए।
जब ठगी का राज खुला
कई महीनों तक रिटर्न न मिलने पर निवेशकों को शक हुआ और वे एसएसपी अजय सिंह के पास शिकायत लेकर पहुंचे। जांच में पता चला कि कंपनी के पास किसी वैध अनुमति या एनबीएफसी लाइसेंस की जानकारी नहीं थी। जांच के बाद आरोपी जगमोहन सिंह चौहान को गिरफ्तार किया गया।
आरोपी का प्रोफाइल
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नाम: जगमोहन सिंह चौहान
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उम्र: 55 वर्ष
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मूल निवासी: सटेन गजा गांव, नरेंद्रनगर (टिहरी गढ़वाल)
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वर्तमान पता: ई-ब्लॉक, सरस्वती विहार, नेहरू कॉलोनी, देहरादून
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पेशा: शिक्षक
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परिवार: पत्नी और दो बच्चे — दोनों एक प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस कर रहे हैं।
पुलिस के मुताबिक, ठगी से कमाई गई रकम का एक हिस्सा बच्चों की महंगी शिक्षा पर खर्च किया गया।
एसएसपी बोले — “शिक्षक पद की आड़ में की करोड़ों की ठगी”
एसएसपी अजय सिंह ने बताया,
“जगमोहन सिंह ने अपने शिक्षक पद की आड़ में लोगों का विश्वास हासिल किया। उसने सरकारी योजनाओं के नाम पर झूठे दस्तावेज़ और फर्जी स्कीमें दिखाकर जनता से करोड़ों रुपये ठगे। जांच में अब तक 47 करोड़ रुपये की ठगी की पुष्टि हुई है, जबकि वास्तविक रकम इससे कई गुना अधिक हो सकती है।”