देहरादून को मिला राज्य का पहला आधुनिक दिव्यांग पुनर्वास केंद्र, अब सभी सेवाएं एक ही छत के नीचे

  1. देहरादून को मिला राज्य का पहला आधुनिक दिव्यांग पुनर्वास केंद्र, अब सभी सेवाएं एक ही छत के नीचे

  2. जिलाधिकारी सविन बंसल की पहल रंग लाई, गांधी शताब्दी अस्पताल में शुरू हुआ दिव्यांग पुनर्वास केंद्र

  3. दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम: डीडीआरसी का शुभारंभ

  4. फिजियोथेरेपी से लेकर रोजगार प्रशिक्षण तक, दिव्यांगों के लिए वन-स्टॉप सेंटर बना डीडीआरसी

  5. दून बना मिसाल: उत्तराखंड का पहला आधुनिक दिव्यांग पुनर्वास केंद्र शुरू

  6. दिव्यांगों के सम्मान और सशक्तिकरण का नया अध्याय – डीडीआरसी से जीवन होगा आसान

  7. दिव्यांग प्रमाण पत्र से कृत्रिम अंग तक की सुविधा, अब देहरादून में एक ही जगह पर उपलब्ध

देहरादून। उत्तराखंड में दिव्यांगजनों के जीवन को आसान और सम्मानजनक बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। जिलाधिकारी सविन बंसल की पहल पर देहरादून में राज्य का पहला आधुनिक जिला दिव्यांगजन पुनर्वास केंद्र (डीडीआरसी) शुरू कर दिया गया है। इसका उद्घाटन बुधवार को गांधी शताब्दी जिला चिकित्सालय में विधायक खजानदास की अध्यक्षता में हुआ।

इस अवसर पर महापौर सौरभ थपलियाल मुख्य अतिथि और देहरादून पार्षद सुनीता मंजखोला एवं मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

दिव्यांगजनों के लिए सभी सुविधाएं एक स्थान पर

इस पुनर्वास केंद्र में दिव्यांगजनों को

  • फिजियोथेरेपी,

  • मनोवैज्ञानिक परामर्श,

  • दिव्यांग प्रमाण पत्र,

  • यूडीआईडी कार्ड,

  • कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण,

  • इलाज,

  • रोजगार प्रशिक्षण

जैसी तमाम सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिलेंगी। यही नहीं, दिव्यांगजनों को पुनर्वास केंद्र तक आसानी से पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन ने विशेष डेडिकेटेड वाहन भी तैनात किया है।

कार्यक्रम के दौरान हुए महत्वपूर्ण निर्णय

मुख्य अतिथि महापौर सौरभ थपलियाल ने केंद्र की शुरुआत को “सशक्त समाज के निर्माण की दिशा में मील का पत्थर” बताया। उन्होंने कहा कि यहां मिलने वाली सुविधाएं न केवल दिव्यांगजनों का जीवन आसान करेंगी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और समाज का सक्रिय हिस्सा भी बनाएंगी।

इस दौरान डीडीआरसी का हेल्पलाइन नंबर 8077386815 भी जारी किया गया। साथ ही दिव्यांग अनिल कुमार ढौंडियाल और नीरज बिष्ट को कान की मशीन प्रदान की गई। कार्यक्रम में दिव्यांग छात्रों को कला प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित कर प्रोत्साहित किया गया।

“दिव्यांग नाम से बढ़ा सम्मान”

कार्यक्रम के अध्यक्ष विधायक खजानदास ने कहा कि प्रधानमंत्री ने शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को ‘दिव्यांग’ नाम देकर उन्हें सम्मान और गरिमा प्रदान की है। अब देहरादून में यह पुनर्वास केंद्र दिव्यांगजनों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने खाली पड़े जिला नेत्र चिकित्सालय भवन के उपयोग की सराहना करते हुए कहा कि आने वाले समय में यहां और भी आधुनिक सुविधाएं जोड़ी जाएंगी।

जिलाधिकारी का संकल्प

जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि समाज की लगभग 20 प्रतिशत आबादी किसी न किसी रूप में दिव्यांगता से प्रभावित है। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए प्रशासन का कर्तव्य है कि उन्हें सभी सुविधाएं एकीकृत तरीके से उपलब्ध कराई जाएं। डीडीआरसी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जहां दिव्यांगजनों को उपचार से लेकर रोजगार प्रशिक्षण तक की सुविधाएं एक ही जगह मिल रही हैं।

मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने कहा कि पुनर्वास केंद्र को लगातार और बेहतर बनाने के लिए जो भी सुझाव मिलेंगे, उन पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

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