देहरादून उत्तराखंड की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज होने जा रही है। कांग्रेस ने प्रदेश सरकार के खिलाफ सड़क से लेकर विधानसभा स्तर तक संघर्ष का बिगुल फूंक दिया है। देहरादून स्थित कांग्रेस भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने अगले तीन महीनों तक प्रदेशभर में स्थानीय जन मुद्दों को लेकर व्यापक जन जागरण अभियान और धरना-प्रदर्शन चलाने की घोषणा की।
प्रेस वार्ता में मौजूद प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि कांग्रेस अब सीधे जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को उठाएगी। उन्होंने बताया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता विधानसभा स्तर पर कार्यक्रम करेंगे, जहां महंगाई, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार और स्थानीय विकास जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
गोदियाल ने ऐलान किया कि 16 फरवरी को कांग्रेस कार्यकर्ता राज्यपाल आवास का घेराव करेंगे। उन्होंने कहा कि यह घेराव प्रदेश की जनता की आवाज को संवैधानिक तरीके से उठाने का प्रयास होगा और सरकार की “जनविरोधी नीतियों” के खिलाफ बड़ा संदेश देगा।
सरकार की नीतियों पर साधा निशाना
कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत ने कहा कि पार्टी का हर कार्यकर्ता गांव-गांव और शहर-शहर जाकर लोगों से संवाद करेगा। उनका आरोप था कि प्रदेश सरकार की नीतियों का लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच रहा, जबकि समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रदेश में बढ़ते भ्रष्टाचार को गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि हालात ऐसे बन गए हैं कि राज्य के मूल चरित्र और अस्तित्व पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने महिला अपराध की बढ़ती घटनाओं पर भी चिंता जताई और कहा कि कानून व्यवस्था को लेकर सरकार को जवाब देना चाहिए।
महंगाई और जनजीवन बना मुख्य मुद्दा
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और चकराता विधायक प्रीतम सिंह ने कहा कि महंगाई ने आम परिवारों का बजट बिगाड़ दिया है। रसोई गैस, खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की जरूरतों की बढ़ती कीमतों से लोग परेशान हैं। उनका कहना था कि कांग्रेस इन मुद्दों को विधानसभा से लेकर सड़क तक मजबूती से उठाएगी।
विधानसभा स्तर पर होगा जनसंपर्क अभियान
पार्टी नेताओं ने साफ किया कि यह आंदोलन केवल औपचारिक विरोध नहीं होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर जनता से जुड़ने का प्रयास होगा। हर विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय समस्याओं की सूची बनाकर संबंधित अधिकारियों और सरकार के समक्ष रखा जाएगा।
कांग्रेस का दावा है कि यह तीन महीने का अभियान प्रदेश की राजनीति में एक नया जनदबाव बनाएगा और सरकार को जनता से जुड़े मुद्दों पर ठोस फैसले लेने को मजबूर करेगा।