चारधाम यात्रा 2026: बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को सुबह 6:15 बजे खुलेंगे

बसंत पंचमी पर हुआ ऐलान, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की तिथियां भी परंपरा अनुसार होंगी तय

देहरादून/नरेंद्रनगर। उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा 2026 को लेकर तैयारियां औपचारिक रूप से शुरू हो गई हैं। बसंत पंचमी के पावन अवसर पर श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि की विधिवत घोषणा कर दी गई है। परंपरा के अनुसार टिहरी जनपद के नरेंद्रनगर स्थित राजदरबार में आयोजित धार्मिक समारोह के दौरान यह तिथि तय की गई। इस वर्ष श्री बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल 2026 को सुबह 6:15 बजे श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले जाएंगे।

नरेंद्रनगर राजदरबार में हुई पंचांग गणना

श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की देखरेख में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में महाराजा मनुजयेंद्र शाह की उपस्थिति में राजपुरोहितों ने पंचांग गणना एवं जन्म कुंडली के आधार पर शुभ मुहूर्त का निर्धारण किया। बसंत पंचमी के अवसर पर सुबह करीब 10:30 बजे धार्मिक अनुष्ठान प्रारंभ हुआ, जिसके बाद बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि की औपचारिक घोषणा की गई।

परंपरा के अनुसार बैकुंठ धाम बदरीनाथ के कपाट खुलने की तिथि प्रत्येक वर्ष बसंत पंचमी के दिन ही तय की जाती है।

गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट अक्षय तृतीया को

चारधाम यात्रा की परंपरा के अनुसार अक्षय तृतीया (19 अप्रैल 2026) के शुभ दिन

  • गंगोत्री धाम

  • यमुनोत्री धाम

के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। इसी दिन से औपचारिक रूप से चारधाम यात्रा का शुभारंभ माना जाता है।

केदारनाथ धाम की तिथि महाशिवरात्रि पर होगी घोषित

द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि की घोषणा महाशिवरात्रि के अवसर पर की जाएगी।

यह घोषणा

  • रुद्रप्रयाग जिले के ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर
    में विशेष पूजा-अर्चना और पंचांग गणना के बाद की जाती है।

अन्य केदारों की तिथियां भी तय

चार केदार परंपरा के अनुसार—

  • चतुर्थ केदार रुद्रनाथ के कपाट

    • 18 मई 2026 को दोपहर 12:57 बजे खोल दिए जाएंगे

  • द्वितीय केदार मद्महेश्वर

  • तृतीय केदार तुंगनाथ

इन दोनों के कपाट खुलने की तिथि वैशाखी पर्व पर घोषित की जाएगी।

19 अप्रैल से शुरू होगी चारधाम यात्रा 2026

अक्षय तृतीया के साथ ही 19 अप्रैल 2026 से चारधाम यात्रा की विधिवत शुरुआत हो जाएगी। कपाट खुलने की तिथियों के ऐलान के बाद अब प्रशासन, मंदिर समितियां और पर्यटन विभाग यात्रा व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुट जाएंगे।

चारधाम यात्रा हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहती है और उत्तराखंड की धार्मिक व आर्थिक गतिविधियों की रीढ़ मानी जाती है।

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