गोपेश्वर/चमोली। चमोली जिले में हुई ताज़ा बर्फबारी ने पहाड़ की रफ्तार थाम दी है। मंगलवार दोपहर से शुरू हुई बारिश और बर्फबारी बुधवार सुबह तक जारी रही, जिससे 77 से अधिक गांवों का जनजीवन प्रभावित हो गया। ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ की मोटी परत जमने से हाईवे सहित सात मोटर मार्गों पर आवाजाही बंद है। कई जगहों पर सड़कें इतनी फिसलन भरी हैं कि छोटे वाहन भी नहीं चल पा रहे।
गांवों में हालात चुनौतीपूर्ण बर्फबारी के बाद ग्रामीण इलाकों में हालात कठिन हो गए हैं: लोग घरों में ही कैद, मवेशियों के लिए चारे का संकट, पानी भरने में दिक्कत, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्रभावित
बंड विकास संगठन के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जीवन पूरी तरह प्रभावित है। रामणी गांव के पूर्व प्रधान सूरज पंवार ने कहा कि सड़क पर जमी बर्फ के कारण छोटे वाहन भी नहीं चल पा रहे।
मौसम का मिजाज
मंगलवार दोपहर बाद से शुरू हुई बारिश-बर्फबारी पूरी रात चलती रही। बुधवार पूर्वाह्न करीब 11 बजे बादल छंटे और धूप खिली, लेकिन शाम तक फिर हल्के बादल मंडराने लगे। इससे ठंड और फिसलन बनी हुई है।
सबसे अधिक असर सीमांत इलाकों में
ज्योतिर्मठ क्षेत्र के करीब 36 गांव बर्फबारी से प्रभावित हैं। इसके अलावा चमोली, पोखरी, गैरसैंण, थराली, कर्णप्रयाग और नंदानगर क्षेत्रों के गांव भी प्रभावित हैं।
हालांकि कुछ सीमांत गांव शीतकालीन प्रवास के कारण खाली हैं, लेकिन आबाद गांवों में जनजीवन प्रभावित है।
बर्फबारी के कारण ये प्रमुख मार्ग बंद हैं: ज्योतिर्मठ–मलारी हाईवे, ज्योतिर्मठ–बदरीनाथ हाईवे, ज्योतिर्मठ–औली मोटर मार्ग, गोपेश्वर–चोपता हाईवे, रामणी–पैरी सड़क, छुरागाड़–सुतोल–कनोल सड़क, घेस–बलाण सड़क, प्रशासन की चुनौती
लगातार बर्फबारी के कारण सड़क खोलने का कार्य मौसम साफ होने पर ही तेज़ हो पाएगा। फिलहाल प्राथमिकता फंसे लोगों तक राहत, जरूरी सेवाओं की बहाली और सड़कों से बर्फ हटाने पर है। बर्फबारी ने चमोली में जहां प्राकृतिक सौंदर्य बढ़ाया है, वहीं ग्रामीण इलाकों में जीवन को कठिन बना दिया है। सड़क संपर्क बहाल होना ही हालात सामान्य करने की कुंजी है।