चमोली आपदा: दस सेकेंड में तबाह हुआ पूरा बाजार, सैलाब में बहे लोग सरिया-लकड़ी पकड़कर बचा पाए जान

चमोली जनपद के थराली क्षेत्र के कोटडीप और राड़ीबगड़ इलाकों में बादल फटने के बाद शुक्रवार रात को ऐसा हाहाकार मचा कि लोग इसे याद कर सहम उठते हैं। आसमान से बरसी आफत ने देखते ही देखते पूरे इलाके की तस्वीर बदल दी। वर्षों की मेहनत और पाई-पाई जोड़कर बनाए गए आशियाने, दुकानें और गुजर-बसर की सामग्री कुछ ही सेकेंड में मलबे में तब्दील हो गई। अचानक आए सैलाब ने कई परिवारों को बेघर कर दिया है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चेपड़ों में अचानक आए सैलाब की रफ्तार इतनी तेज थी कि लोगों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। कई लोग मलबे और पानी में बह गए, लेकिन जिन्होंने हिम्मत दिखाई और जो भी सरिया, लकड़ी या पत्थर हाथ लगा उसे पकड़ लिया, वही अपनी जान बचा पाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरा बाजार खत्म होने में सिर्फ दस सेकेंड लगे।

पीड़ितों की आपबीती

चेपड़ों युवक मंगल दल अध्यक्ष भरत सिंह ने बताया कि घटना के समय वे भी बाजार में मौजूद थे। अचानक गदेरे से आया सैलाब आबादी की ओर मुड़ा और लोग अपनी दुकानें खाली ही कर रहे थे कि देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए। उन्होंने कहा, “दस तक गिनने जितना समय भी नहीं लगा और लोग बहने लगे। मैं खुद एक सरिया पकड़कर किसी तरह किनारे पहुंचा।”

इसी तरह, आपदा में घायल देवी जोशी ने बताया कि वे खुद दस मीटर तक सैलाब में बह गईं। इस दौरान उन्होंने अपने पिता को बचाने की कोशिश की और अपनी जान की परवाह किए बिना उन्हें खींचने का प्रयास किया, लेकिन उनके पिता सैलाब में लापता हो गए। देवी जोशी का कहना है कि अगर बहते वक्त उन्हें सरिया या पत्थर न मिलता तो शायद वे भी मलबे की भेंट चढ़ जातीं।

नुकसान और प्रशासन की जानकारी

तहसील प्रशासन के अनुसार, आपदा में करीब 63 से अधिक दुकानें और मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। कई वाहन भी मलबे में दब गए। प्रभावित लोगों ने प्रशासन से मुआवजे और पुनर्वास की गुहार लगाई है।

पूर्व जिपंस और आपदा प्रभावित देवी जोशी ने प्रशासन से अपने लापता पिता की खोजबीन तेज करने की मांग की है। उन्होंने सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अन्य सुरक्षा बलों से रेस्क्यू अभियान में तेजी लाने की अपील की है।

हालात अब भी भयावह

आपदा के बाद पूरे क्षेत्र में आवाजाही मुश्किल हो गई है। कई जगहों पर मलबे के कारण रास्ते बंद हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्हें तात्कालिक मदद और सुरक्षित ठिकाने की बेहद जरूरत है। वहीं प्रशासन राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है, लेकिन हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।

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