देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र में इस बार विधायकों के सवालों की बौछार देखने को मिलेगी। सदन में 600 से अधिक प्रश्न लगाए गए हैं, जिनके जवाब का इंतजार रहेगा। विपक्ष के आक्रामक तेवरों के चलते सरकार को सदन में कड़े सवालों का सामना करना पड़ सकता है।
बजट सत्र के पहले दिन लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह के अभिभाषण के साथ सत्र की शुरुआत हुई, जिसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बजट पेश किया। सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही में प्रश्नकाल प्रमुख रहेगा। इसके साथ ही सरकार आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की सात रिपोर्ट सदन के पटल पर रखेगी।
600 से ज्यादा सवालों से गरमाएगा सदन
कार्यसूची के अनुसार इस बार सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायकों की ओर से 600 से अधिक प्रश्न लगाए गए हैं। परंपरा के अनुसार मुख्यमंत्री के पास सबसे अधिक विभाग होने के कारण उनसे जुड़े सवाल भी बड़ी संख्या में रहते हैं। ऐसे में विपक्ष इन सवालों के जरिए सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर रहा है।
सत्र के पहले दिन ही हंगामा
सत्र के पहले दिन ही विपक्ष ने सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया। विपक्षी विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया और सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन भी किया। विपक्ष की मांग है कि विधानसभा सत्र की अवधि बढ़ाई जाए ताकि जनहित के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हो सके।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन
सत्र शुरू होते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी विरोध प्रदर्शन किया। जंगलचट्टी बैरियर पर कार्यकर्ताओं ने बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश की, जिसके चलते वहां भारी पुलिस बल तैनात किया गया। वहीं सुमित हृदयेश ने हल्द्वानी के आईएसबीटी और अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम की खामियों को लेकर गैरसैंण विधानसभा परिसर में धरना दिया।
सदन में रखे जाएंगे चार अध्यादेश
सत्र के दौरान सरकार चार महत्वपूर्ण अध्यादेश भी सदन के पटल पर रखेगी। इनमें उत्तराखंड दुकान एवं स्थापना (रोजगार विनियमन और सेवा शर्त) संशोधन अध्यादेश 2025, उत्तराखंड जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अध्यादेश 2025, उत्तराखंड माल एवं सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश 2025 और उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश 2026 शामिल हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सवालों की बड़ी संख्या और विपक्ष के तीखे तेवरों के कारण इस बार बजट सत्र के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की संभावना बनी रहेगी।